पहली चुदाई में गर्लफ्रेंड हो गई बेहोश

जवान लड़की की चुदाई कहानी में पार्क में एक लड़की मुझे पसंद आई. मैं उसके पास वाले बेंच पर बैठक्र उसे देखने लगा. वह भी मुझे देख रही थी. मैंने भी हिम्मत की और उसके पास बैठ गया।

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम शिव है पर मेरे दोस्त मुझे आर्यन नाम से भी बुलाते हैं।

मैं रोहतक, हरियाणा का रहने वाला हूं।
मैं अपने बारे में आपको और बताता हूं— मैं राज्य स्तर पर 800 मीटर में हरियाणा राज्य को गोल्ड मेडल दिलवा चुका हूं और सात बार जिला स्तर पर दो सिल्वर मेडल और पांच गोल्ड मेडल दिलवा चुका हूं।

खेलो में रुचि होने के कारण मेरा बदन शुरू से ही कसरती रहा है।
मेरे लन्ड का साइज तो मैंने कभी नापा नहीं, पर मेरे अनुसार ये किसी भी लड़की को खुश करने के लिए काफी लंबा और मोटा है।

अब ज्यादा देरी न करते हुए हम जवान लड़की की चुदाई कहानी की तरफ चलते हैं।

ये बात 2019 की है जब मैं अपने ननिहाल भिवानी में आया हुआ था।
मैं और मेरा मामा का लड़का पार्क में घूमने गए हुए थे।

तो हम दोनों की नजर एक लड़की पर पड़ी जिसने जींस और कुर्ती डाल रखी थी।
वो दिखने में बहुत खूबसूरत लग रही थी और अब लड़कों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी।
हम दोनों भी उसको देखने के लिए पास में ही बने बेंच पर बैठ गए।

मैं उसे निहारे जा रहा था.
तभी उसने मुझे अपनी तरफ देखते हुए पकड़ लिया।
पर उसने ध्यान हटा लिया.

पर बाद में मुझे भी लगा कि शायद वो भी मेरी तरफ देख रही है।
जवान लड़की की चुदाई कहानी के चक्कर में मैं आपको नेहा के बारे में बताना भूल ही गया।

उसका नाम नेहा था जो मुझे उससे बात करने के बाद पता चला।
उसके चूचों का साइज 34 था और कमर 28 की और चूतड़ 36 के थे!

वो मस्त फिगर की मालकिन थी।
मेरा लिंग तो उसे देखते ही सलामी देने लगा था।

अब कहानी पर आते हैं।

हम दोनों की कुछ देर बाद नजर मिली तो पाया कि उसे भी मुझमें रुचि है।

मैंने भी हिम्मत की और उसके पास जाके बैठ गया।
मेरे बैठते ही वो मुस्कुरा दी।
मैं भी उसे देख मुस्कुरा दिया।

मैंने उससे उसका नाम पूछा।
उसने बताया कि उसका नाम नेहा है और वो अपनी बुआ के घर पर आई हुई है।
वो हिसार की रहने वाली थी।

हम दोनों ने ऐसे ही कुछ देर बातें की और जाते-जाते उसने मुझे अपना नंबर दिया।
उसने कहा, “जनाब! बाकी की बातें फोन पर करते हैं।”

रात को घर जाके मैंने खाना खाया और नेहा को ‘हाय’ का मैसेज भेजा।
पर नेहा का रात को कोई मैसेज नहीं आया।

सुबह जब उठा तो नेहा का मैसेज देख मुझे बहुत खुशी हुई।
उसने लिखा था, “सॉरी शिव! वो मैं बहुत थकी थी तो मैं सो गई थी।”

फिर उसने बताया कि वह हिसार में बीए की प्रथम वर्ष की छात्रा है।
मैं भी उस समय बीएससी के दूसरे वर्ष का छात्र था।

कुछ दिन तो हमारी यूं ही बातें हुईं।
पर दोनों में से किसी ने भी पहल करने की शुरुआत नहीं की।

एक दिन शाम को मैंने उसे मैसेज किया, “नेहा! बुरा ना मानो तो एक बात पूछूं?”
तभी उसका जवाब आया, “अरे यार! ये भी कोई बात है? पूछो, क्या पूछना है!”

मैंने उससे कहा, “क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?”

उसका पहले तो कुछ देर जवाब नहीं आया, तो मुझे लगा शायद नेहा बुरा मान गई है। मैंने उसे ‘सॉरी’ लिखा तो उसका जवाब आया।

उसने हंसते हुए कहा, “अरे ऐसी कोई बात नहीं है! अभी तो कोई नहीं है। वैसे तुम ये बात क्यों पूछ रहे हो?”
मैंने भी लिखा, “गर्लफ्रेंड तो मेरी भी नहीं है!”

उसने फिर से हंसने का emoji भेजा।
ऐसे ही मजाक करने के बाद हम दोनों सो गए।

अगले दिन मैं रोहतक के लिए निकल गया और वो भी हिसार जा चुकी थी।

मैं उसे अंदर ही अंदर बहुत पसंद करने लगा था।
मुझे डर था कि कहीं और कोई उसे फंसा ना ले।
मैंने उसी दिन प्लान बनाया कि मैं हिसार जाकर उसे अपने प्यार का इजहार कर दूंगा।

चार दिन बाद मैंने एक आर्टिस्ट से उसका एक सुंदर सा पेंसिल स्केच बनवा लिया और उसे फ्रेम करवा कर एक बड़ी चॉकलेट के साथ पैक करा लिया।
इसी बीच उसे मेरे आने का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था।

मैं अगले ही दिन घर पर दोस्त के यहाँ शादी में जाने का बहाना लगाकर सुबह हिसार के लिए ट्रेन से निकल पड़ा।

हिसार पहुंचने से पहले मैंने नेहा को पूछा कि वो कहाँ पर है।
उसने बताया कि वो घर से निकली है और बीस मिनट में कॉलेज पहुंच जाएगी।
ये पूछ कर मैंने भी फोन काट दिया और ट्रेन से उतर कर पैदल ही उसके कॉलेज की तरफ निकल पड़ा।

मैं उसके कॉलेज के गेट के सामने उसका इंतजार कर रहा था।
तभी मुझे वो अपनी सहेलियों के साथ आती हुई नजर आई।

वो आज देखने में और भी सुंदर लग रही थी; उसने काले रंग का सूट-सलवार पहना हुआ था।
एक बार तो मुझे भी देख उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।

मुझे देखते ही वो खुशी से झूम उठी!
मैंने भी उसे आगे बढ़ कर गले लगा लिया।

उसकी सहेलियों को भी उसने मेरे बारे में बताया और हम दोनों फिर पास ही बने एक रेस्टोरेंट में चले गए।

वहां पहुंचकर उसने और मैंने एक दूसरे का हालचाल पूछा, फिर मैंने ज्यादा देर न करते हुए उसके हाथ में वो गिफ्ट थमा दिया।
वो देख कर चौंक गई कि मैं आज सिर्फ उसे स्पेशल गिफ्ट देने आया हूं।

मैंने उसे खोलने के लिए कहा।
उसने भी देर ना करते हुए जैसे ही खोला, उसकी आंखें देखते ही खुली की खुली रह गई!
उसकी खुशी का कोई अंदाजा नहीं था।

तभी मैंने उसे गुलाब का फूल और चॉकलेट देकर “आई लव यू” बोल दिया!
उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि आज कैसे एकदम से ये सब हो रहा है।

उसने भी खुशी-खुशी मुझे कहा, “आई लव यू टू!”
मैंने सुनते ही उसे गले लगा लिया और उसके माथे पर किस कर लिया।

किस करते ही वो शर्मा कर नीचे झुक गई।

उसके बाद मैंने और उसने खाना खाया और तभी मैं कुछ और सोचता तो उसने कहा कि आज उसे जल्दी घर जाना है।
मैंने भी दबाव देना सही नहीं समझा और मैं भी उसके जाने के बाद घर के लिए निकल पड़ा।

मेरी खुशी का आज कोई ठिकाना नहीं था।

घर पहुंचते ही उसका कॉल आ गया.
उसने मुझे आज के लिए शुक्रिया कहा और बताया कि वो भी मुझसे प्यार करती थी पर बोलने के लिए डर रही थी।

ऐसे ही हमारी रातों को लंबी-लंबी बातें और वीडियोकॉल होने लगी।

अब हमारे बीच किस और सेक्स के बारे में भी खुल कर बातें होने लगी थी।

दिसंबर का महीना था और उसके और मेरे दोनों के कॉलेज के पेपर थे तो मिलना हो नहीं सकता था।

पेपर खत्म होने के बाद हमने मिलने की सोची और 6 जनवरी को हमने मिलने का प्लान बनाया।
तब तक मैंने हिसार के एक अच्छे से होटल में बुकिंग कर ली थी।

मैं उसे उसके कॉलेज के सामने लेने गया और मैं और नेहा दोनों होटल के लिए निकल पड़े।

वहां पहुंच कर मैंने दोनों की ID जमा करवाई व फिर रूम की चाबी लेकर रूम की तरफ बढ़ने लगे।

आज उसने काले रंग की जैकेट और नीले रंग की जींस पहन रखी थी, जिसमें उसका उभार साफ-साफ नजर आ रहा था।
मेरा लन्ड तो उसे देखते ही फनफनाने लगा!
उसे भी मेरी ऐसी हालत देख हंसी आ गई।

मैंने रूम में आकर रूम अंदर से लॉक किया और मैंने उसे बैठने को कहा।

हमने थोड़ी देर बैठ कर बातें की और बताया कि उसे मिलने का बहुत दिन से इंतजार था।

तभी मैंने उसकी गर्दन में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर अपने हाथ रख दिए।

उसके होंठों को छूते ही ऐसा लगा कि जैसे मैं किसी रूई को छू रहा हूं!
उसके होंठ इतने रसीले थे कि मैं उसके होंठों में खो सा गया था।

ऐसे ही हम एक-दूसरे को बीस मिनट तक किस करते रहे।

फिर मैंने उसकी जैकेट को उतार दिया।
उसने काले रंग की एक जाली वाली ब्रा पहनी हुई थी जिसमें वो किसी मॉडल की तरह नजर आ रही थी।

मुझे ऐसे उसकी तरफ देखते देख उसने नजरें झुका लीं।

फिर मैं उसके 34 साइज के चूचों पर टूट पड़ा और ब्रा के ऊपर से उन्हें चूसने लगा।
मैं मुंह से उसका दायां चूचा चूस रहा था और अपने बाएं हाथ से उसका दूसरा चूचा दबा रहा था।

एक हाथ नीचे ले जाकर मैं जींस के ऊपर से ही उसकी चूत पर रगड़ने लगा।

ऐसा करने से वो अपना आपा खोने लगी और जोर-जोर से सिसकारी लेने लगी।

उसकी आवाज़ सुनकर मुझे भी जोश चढ़ने लगा और मैंने फिर उसकी जींस और पैंटी एकसाथ उतार दी और साथ ही अपनी जींस और शर्ट भी उतार दी।

मैं उसके कान पर किस करने लगा जिससे वो सिहर उठी।

मैं कान से होता-होता उसके गले पर और फिर मैंने अपने मुंह को सीधा उसकी चूत पर टिका दिया और उसके दाने को अपने मुंह में भर लिया!

मेरा यह पहली बार था पर फिर भी मेरे अंदर XXX वीडियोज देखने से अब ज्ञान भरा पड़ा था कि एक लड़की को उसकी चरम सीमा पर कैसे लेकर जाते हैं।
जैसे ही मैंने अपनी जीभ को उसके दाने पर गोल-गोल घुमाना शुरू किया, उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और सारा पानी मेरे मुंह पर लग गया!

मैं फिर भी लगातार उसकी चूत को चाटता रहा।
उसका शरीर अब फिर से गरम होने लगा था और मैं भी अब तेज-तेज अंदर तक जीभ को चलाने लगा था।
वो हाथ से मेरे सिर को पकड़ चूत पर दबाव बना रही थी।

फिर मैंने उसे ’69’ पोज में आने को कहा जैसा कि मैंने XXX में देखा था।
उसने पहले तो मना कर दिया.
पर फिर जैसे ही मैंने उसकी चूत से अपना मुंह हटाया तो उसने हामी भर दी।

जैसे ही उसने मेरा लोड़ा मुंह में भरा, मेरी रूह अंदर तक हिल गई!
मुझे असीम आनंद की अनुभूति हो रही थी।
मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और वो भी जोश में आकर मेरा लोड़ा अंदर तक चूसने लगी और थोड़ी देर बाद हम दोनों एक साथ एक-दूसरे के मुंह में झड़ गए।

हमने बाथरूम में जाके एक-दूसरे को साफ किया और मैं उसे नंगे ही गोद में उठा कर बेड पर ले आया।

नेहा और मुझे बहुत तेज भूख लगी थी।
तभी नेहा ने अपने बैग से टिफिन निकाला और मुझे थमा दिया।

मैंने खोल कर देखा तो उसमें आलू के सात परांठे थे।
तभी उसने टिफिन से दही निकाली और हम दोनों ने नंगे ही बैठ कर एक-दूसरे को परांठे खिलाए।

परांठे खाने के बाद मैं उस पर दोबारा टूट पड़ा और उसे बेतहाशा चूमने लगा।
वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और मेरा लोड़ा भी अब कड़क हो चुका था।

मैंने देर ना करते हुए उसकी टांगों को खोल कर लौड़े को उसकी चूत के दाने पर रखा और उसकी चूत के दाने को लौड़े से रगड़ने लगा।

वो जोर-जोर से सिसकारी लेने लगी और मेरे लौड़े को पकड़ कर चूत में डालने लगी।

पर मैं उसे और तड़पाना चाहता था।

फिर मैं लोड़ा थोड़ा सा अंदर डाल उसकी चूत को मसलने लगा।

अब ये सब उसके बस से बाहर हो रहा था तो वो मुझसे लोड़ा डालने के लिए मिन्नतें करने लगी!
मैंने भी और तड़पाना ठीक नहीं समझा।
मैंने एक झटके में आधा लोड़ा उसकी चूत में उतार दिया!

उसे अंदाजा नहीं था कि ये सब एकदम से हो जायेगा।
वो एकदम से चीख पड़ी! उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।

मैंने लोड़े को अंदर ही रखा और उसे किस करने लगा।

जैसे ही उसका दर्द कम हुआ, मैंने एक झटका और मारा और पूरा लोड़ा उसकी चूत में उतार दिया!
वो लोड़े को बाहर निकालने के लिए मचलने लगी और अपने पैरों को फड़फड़ाने लगी।
मैं उसे चूमता रहा और जैसे ही उसका दर्द कम हुआ, मैं धीरे-धीरे उसकी चूत में झटके लगाने लगा।

वो भी अब मेरा साथ देने लगी और हर झटके का जवाब वो गांड़ उठा-उठा कर दे रही थी।

दस मिनट के बाद वो झड़ गई और वो निढाल होकर साइड में लेट गई.
पर मेरा अभी भी हुआ नहीं था।

मैंने उसे उठाना चाहा पर उसने कहा कि अब उससे नहीं होगा और उसमें अब हिम्मत नहीं है उठने की।
अब तक वो चार बार झड़ चुकी थी।

पर मेरा लोड़ा कहां मानने वाला था! मैंने उसे अपने नीचे लिटाया और उसकी चुदाई करने लगा।

वो बिल्कुल थक कर चूर हो चुकी थी।
इतनी ठंड में भी हम दोनों पसीने से लथपथ थे।
मेरा जैसे ही होने वाला था तो मैंने देखा कि नेहा बेहोश हो चुकी है!

उसे ऐसी हालत में देख मेरा लोड़ा मेरे मुंह में आने को हो गया!
मैं घबरा गया और उसके हाथ-पैर मसलने लगा।

मैंने उसे अपने हाथों से उठाया और उसे पानी पिलाया।

करीब 3-4 मिनट के बाद वो अच्छे से होश में आई।
मेरा लौड़ा किसी चूसे हुए आम की तरह हो गया था।

तभी मेरे लोड़े को देख वो हंसने लगी।
फिर हंसते हुए एकदम से बोली, “लगता है तुम आज मिलने नहीं, मारने आए हो!”

उसे ऐसे देख मेरी जान में जान आई।
फिर मैंने उसे ‘सॉरी’ बोला और उसे जोर से गले लगा लिया।

इसके बाद हम दोनों को नींद आ गई।

करीब एक घंटे के बाद जैसे ही मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि नेहा सोई हुई थी।

मैंने हल्का सा कंबल हटाया और देखा तो उसका बदन किसी मोती की तरह चमक रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे उस लड़की की चूत और चूचे मुझे बुलावा दे रहे हों।

मेरा फिर से मूड बनने लगा।
मैंने फिर से नेहा के होंठों पर हाथ रख दिए और जैसे ही उसकी आंख खुली वो हंसने लगी।
वो बोली, “फिर से शुरू हो गए!”

वो भी मेरा साथ देने लगी और फिर मैंने उसे जल्दी से ‘घोड़ी’ बनने को कहा।

मैंने एक तकिए को उसकी छाती के नीचे लगाया और दोनों हाथों से उसके चूतड़ों पर पकड़ बना ली।

मैंने लोड़े को हाथ से उसकी चूत पर सेट किया और दो झटकों में लोड़े को चूत में उतार दिया!
वो भी तेज-तेज सिसकारी के साथ अपनी गांड को लोड़े पर पटकने लगी।

करीब पंद्रह मिनट की चूदाई के बाद मैं झड़ने को हुआ तो मैंने अपना लोड़ा उसकी चूत से निकाल कर सारा माल उसके पेट पर गिरा दिया।
राज्य स्तर का खिलाड़ी होने के कारण स्टेमिना मुझमें भरपूर था जिसका अंदाजा नेहा भी लगा चुकी थी।
फिर मैंने एक कपड़े से खुद को और नेहा को साफ किया।

हमने देखा कि हमें आए हुए पांच घंटे हो चुके थे।
उसके बाद हम कपड़े पहन कर होटल से नीचे आए।

जाते-जाते मैंने उसको अंतिम बार गले लगाया और हम फिर अपने-अपने घर के लिए निकल पड़े।

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