जवान साली को बीवी के सामने चोदा

वर्जिन साली Xxx चुदाई कहानी में मेरी कुंवारी साली मेरे घर आई हुई थी. हमारे पास एक ही कमरा था तो हम तीनों एक बेड पर लेटे थे. मेरी बीवी मेरी मालिश कर रही थी.

मित्रो! मैं देवराज कुशीनगर, यूपी से हूँ।
जो मेरे अपने लोग हैं, वे सब मुझे देव भी बोलते हैं और राज भी…

मैं अंतर्वासना पर बहुत सालों से कहानियाँ पढ़ता आया हूँ।
बहुत सारी काल्पनिक और हकीकत वाली कहानियाँ मैंने पढ़ी हैं, तो मुझे लगा कि क्यों न मैं भी अपनी कहानी आपको सुनाऊँ, जो कि एक सच्ची घटना है!
यह अंतर्वासना पर मेरी पहली कहानी है, तो वर्जिन साली Xxx चुदाई कहानी में यदि कोई गलती हुई हो तो आप सब मुझे क्षमा करें और मेरी कमियाँ जरूर बताएँ ताकि मैं सुधार कर सकूँ।

मेरी बीवी का नाम सरिता है।
वह बहुत जोशीली है और मैं भी चोदने का बहुत शौकीन हूँ।

सोने के पहले हर दिन मेरी बीवी मेरी तेल मालिश करती थी।
उसे मेरा लंड सहलाने में काफी मजा आता है।

एक बार मेरी साली भारती कुछ दिनों के लिए मेरे घर आई हुई थी।
वह बहुत चंचल और मजाकिया स्वभाव की है।

मेरी शादी हुए कुछ महीने ही बीते थे।
उस समय हम लोग किराये के मकान में रह रहे थे, जिसमें सिर्फ एक कमरा और रसोई थी।

एक रात जब मेरी बीवी मुझे तेल लगा रही थी तो मेरी साली भी तेल मालिश करने में अपनी बहन का साथ देने लगी।

गर्मी के दिन थे।
मैंने केवल लुंगी और गंजी पहन रखी थी।
रात को मैं कुछ नहीं पहनता हूँ, उस रात भी नहीं पहना था।
उसने पैर के निचले हिस्से में मालिश करनी शुरू कर दी, जबकि सरिता मेरे शरीर के बाकी हिस्सों की मालिश कर रही थी।

सरिता ने भारती से कहा, “आओ! तुम इनकी छाती और गर्दन की मालिश कर दो, मैं पैरों में तेल लगा देती हूँ।”

भारती वैसे ही करने लगी।
उसने मेरी छाती पर मालिश करते वक्त धीरे से मेरा स्तन दबा दिया और मुस्कुरा दी।
मैं भी उसकी मालिश का आनंद ले रहा था।

मैंने कहा, “अरे साली जी! जरा और जोर से मालिश करो। तुम्हें तो मालिश करना बहुत अच्छी तरह से आता है! वैसे तो आपकी बहन भी कम नहीं है, वह भी मालिश करने में होशियार है!”

सरिता मालिश करते-करते अब जांघ तक पहुँच गई थी।
मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

लुंगी के भीतर से ही सरिता ने मेरे लंड को पकड़ लिया क्योंकि वह हर रोज मेरे लंड में तेल लगाती थी।

उसने लंड की मालिश करनी शुरू कर दी थी।
उस समय मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था।

जानबूझकर मैंने लुंगी हटा दी।
लंड की छाया कमरे की दीवार पर दिखाई देने लगी, जो देखने में बहुत बड़ी दिख रही थी।

उस समय तक साली की निगाह उस पर नहीं पड़ी थी।

मैं अपना लंड साली को दिखाना चाह रहा था।
मैंने भारती से कहा, “अरे साली जी! उधर दीवार पर तो देखो, क्या दिखाई दे रहा है?”

भारती की निगाह उस पर पड़ते ही वह बोली, “अरे बाप रे! जीजा जी, तुम बहुत शैतान हो! अरे दीदी, मुझे डर लग रहा है, मैं जा रही हूँ!”

यह सुनते ही सरिता ने मेरे लंड के ऊपर लुंगी डाल दी और कहने लगी, “अरे भारती ! ये ऐसे ही करते हैं। इनको शर्म भी नहीं आती!”
मैंने कहा, “शर्म किस बात की? साली तो आधी घरवाली होती है! कुछ दिन के बाद इसकी भी तो शादी होगी, तो कुछ तो जानकारी चाहिए!”

सरिता कहने लगी, “अब मालिश हो गई, अब सो जाइये!”
और उसने भारती को भी सो जाने के लिए कह दिया।

एक ही कमरा होने के चलते हम तीनों को एक ही जगह सोना पड़ा।
साली अपनी बहन की बगल में सो गई।

मुझे नींद नहीं आ रही थी।
मैं सरिता के सो जाने का इंतजार कर रहा था।

जब मुझे लगा कि सरिता सो गई है, मैंने भारती की चूची दबाना शुरू कर दी।
शायद उसे भी अच्छा लग रहा था इसलिए वह चुपचाप लेटी रही।

लेकिन मुझे डर लग रहा था कि कहीं सरिता जग न जाए।
भारती के प्रतिकार न करने के कारण मेरा मन बढ़ रहा था।
अब मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।
मैं भारती के स्तन और जोर से दबाने लगा।

मैंने सोचा कि आज दोनों बहनों को चोदूँगा इसलिए मैं सरिता के ऊपर चढ़ गया और भारती को चूमने लगा।
मेरे इस प्रकार उसके ऊपर चढ़ने से सरिता की नींद टूट गई।

वह मेरे हाथ को पकड़कर कहने लगी, “अरे, क्या कर रहे हो? यह बिल्कुल ठीक नहीं है! अगर मैं नहीं जगती तो तुम भारती को नहीं छोड़ते! तुम कितने हरामी हो! बेचारी भारती को भी बर्बाद करोगे! मजा करना है तो मेरे साथ करो, मेरी बहन को मत छूना!”

मैं उस पर से नीचे उतर गया और उसकी चूची सहलाने लगा।
उसके बाद भारती उठकर चली गई।

मैं सरिता से कहने लगा, “आज मुझे तुम दोनों बहनों को चोदने का मन कर रहा है, प्लीज उसे बुलाओ!”

तब सरिता कहने लगी, “बेचारी की शादी होने वाली है, अगर उसकी झिल्ली फट गई तो उसका मर्द उस पर शक करेगा! तुम्हारा बहुत बड़ा लंड है, बेचारी बर्बाद हो जाएगी, उसे छोड़ दो! तुम मेरे साथ जैसा चाहो करो, मगर उसे छोड़ दो!”

मैंने भी इसी में भलाई समझी और केवल सरिता से ही अपनी प्यास बुझाई।

दूसरे दिन सरिता किसी काम से बाहर गई हुई थी।
मैं उस दिन ऑफिस से जल्दी घर आ गया था।

मैंने भारती से पूछा, “सरिता कहाँ है?”
तो उसने कहा, “वह बाजार गई है और दो घंटे के बाद आ जाएगी।”

मैंने मौका अच्छा समझा और मन ही मन उसे चोदने का मन बनाने लगा।

मैंने भारती से पूछा, “कल रात में क्यों उठकर चली गई थी?”
भारती बोली, “दीदी जग गई और ऐसे देख ली, तो मुझे शर्म आने लगी थी!”

मैंने उसको अपनी बाँहों में भर लिया और चूमने लगा।

मैंने कहा, “भारती, अभी अच्छा मौका है! तुम्हें चोदे बिना मुझसे रहा नहीं जा रहा है!”
भारती बोली, “प्लीज जीजा जी! दीदी कहीं आ गई तो मुझे बहुत मार पड़ेगी और आपको भी!”

लेकिन मेरा लंड तन चुका था।
मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया, अपनी पैंट की चैन खोलकर लंड बाहर निकाल दिया।

वह मेरे लंड को देखने लगी और पकड़कर बोली, “अरे बाप रे! कितना बड़ा है? पूरा एक बित्ते का है! मुट्ठी में भी नहीं आ रहा!”

मैंने भारती को सहलाने को कहा।
वह मान गई और सहलाने लगी।

तब मैंने कहा, “अरे साली जी! इसका स्वाद भी तो लो!” और मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया।
वह मेरे लंड को चाटने लगी।

भारती कह रही थी, “क्या खतरनाक लंड है! मैं आपका अपने मुँह में ही गिरा लूँगी!”
कहते हुए वह जोर-जोर से चूसने लगी और पूरा गले के अंदर तक ले जा रही थी।

अब मेरी हालत खराब होने लगी थी और लंड पिचकारी मारने को तैयार था।

तभी कुछ ऐसा हुआ, जैसा भारती पहले ही डर रही थी… भूल से दरवाजा खुला रह गया था।
ज्यों ही मेरा गिरने वाला था, सरिता कमरे में आ गई।

अपनी आँखों के सामने यह नजारा देखकर वह आग बबूला हो गई और मुझे और भारती को गाली देने लगी।

वह भारती को कह रही थी, “अरे, तुम्हारे जीजा तो एक नंबर के बदमाश हैं ही, तुम भी एक नंबर की छिनार निकली!”
और उसने दो थप्पड़ जड़ दिए।

भारती रोते हुए बोली, “जीजा जी नहीं माने, मैं क्या करती? मैं कल घर चली जाऊँगी! मेरा यहाँ रहना तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा है। क्या मैं किसी दूसरे के साथ कुछ कर रही थी? ये अपने जीजा जी ही तो हैं! अगर तुम्हें ईर्ष्या होती है तो मैं कल जा रही हूँ!”

मैंने सरिता को समझाया, “यह घर की ही तो बात है। अगर तुम नहीं चाहती तो अब कुछ नहीं करूँगा।”
सरिता मुझे ऐसे घूर रही थी जैसे मुझे अभी खा जाएगी और एकदम से बोली, “दोनों के दोनों चुप हो जाओ और मुझे अकेला छोड़ दो!”

रात्रि में हम सब ने खाना खाया और एक ही कमरा होने के चलते हम तीनों फिर एक ही जगह सो गए।
भारती के घर चले जाने की बात से सरिता कुछ डरी हुई थी।

वह भारती से कहने लगी, “देख, जब इतना सब कर ही ली हो, तो आज तुम्हीं इनकी मालिश कर दो, मुझे थकान हो गई है!”

सरिता की बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई और भारती भी मान गई और मेरे पैर दबाने लगी।
सरिता कह रही थी, “अच्छी तरह मालिश कर देना, मुझे नींद आ रही है। मुझे नींद आ जाए तो मत जगाना।”

भारती धीरे-धीरे मालिश करने लगी।
कुछ देर के बाद ऐसा लगा कि सरिता सो गई है।

अब हम में हिम्मत आ गई।
मैंने अपनी लुंगी खोल दी और भारती को लंड में तेल लगाने का इशारा किया।
वह समझ गई और मेरे लंड की मालिश करने लगी।

लंड कठोर हो चुका था, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।

मैंने भी भारती की दोनों टाँगों के बीच में अपना हाथ लगाया। पहले उसने रोकना चाहा, मगर फिर विरोध नहीं किया।

भारती ने सलवार पहन रखी थी।
मैंने उसकी सलवार की डोरी खोल दी और उसकी बुर को सहलाने लगा।

उसने मेरे लंड को हाथ फैलाकर नापा और बोली, “बाप रे! यह तो एक बित्ते से भी बड़ा है, मैं नहीं सह पाऊँगी और दीदी भी जग जाएगी!”

मैंने कहा, “तुम्हारी दीदी भी पहली बार ऐसे ही कह रही थी, मगर एक बार के दर्द के बाद अब मज़ा लेती है! कुछ नहीं होगा, मैं बहुत धीरे से चोदूँगा। तुम्हारी दीदी को भी पता नहीं चलेगा।”

अब मैंने भारती को समझाया कि हम दोनों 69 वाले पोजीशन में आ जाते हैं।
भारती मान गई और हमने एक-दूसरे को तब तक चूसा जब तक कि एक-दूसरे के मुँह में झड़ नहीं गए!

इसके बाद मैंने उसे चित लेटा दिया और अपने लंड और उसकी बुर में थूक लगाया।
अब मैं उसकी दोनों जांघों के बीच में आ गया और लंड को उसकी बुर पर रख दिया।

उसने डर के मारे मेरे लंड को पकड़ लिया और बोली, “इतना बड़ा नहीं सहा जाएगा, मैं अभी छोटी हूँ!”
मैंने कहा, “अच्छा बाबा, मैं तुम्हें जरा भी नहीं दुखने दूँगा!”

ज्यों ही मैंने अपना लंड अंदर करना चाहा, मुझे लगा कि सरिता जग गई है।
लेकिन उस समय मैं इतने जोश में था कि इस बात की मैंने परवाह ही नहीं की।

मैंने भारती की बुर में अपना लंड डाला ही था, सिर्फ धक्का देना बाकी था।
लेकिन मुझे डर लग रहा था कि सरिता कहीं काम बिगाड़ न दे, इसलिए मैंने बहुत धीरे से लंड को ठेला।

मगर भारती की बुर इतनी कसी थी कि लंड अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था।
भारती की आँखों से आँसू निकलने लगे, मगर वह चुप थी क्योंकि उसे भी अपनी बहन का डर था।

मैंने भारती के मुँह में अपना मुँह डाल दिया ताकि वह चिल्ला न सके।
उसे थोड़ा सा और सहने को कहा।

अब मैंने जोर से धक्का लगाया और लंड झट से अंदर चला गया! मगर भारती से रहा न गया और वह जोर से चिल्ला उठी।

भारती जोर से चिल्लाई, “बाप रे बाप! मैं मर गई आज! दीदी, मुझे बचाओ! जीजा जी, मुझे छोड़ दो!” और वह उठकर बैठना चाह रही थी, लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा और वैसे ही कुछ पल रुका रहा।

भारती की आवाज सुनते ही सरिता उठ गई और कहने लगी, “अरे, तुम कितने निर्दयी हो! इतनी छोटी ब.च्ची को ऐसे पेलते हैं? अब तो तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई न, बस अब रहने दो! बेचारी की सील टूट गई होगी!”

सरिता ने कमरे की बत्ती तेज कर दी।
बेडशीट पर खू.न के धब्बे पड़े थे, भारती की बुर से खू.न निकल रहा था।
मेरा लंड भी पूरी तरह से छिल चुका था।

शायद साली की चूत की सील टूट चुकी थी.
लेकिन मैंने इस बार सरिता की एक भी नहीं सुनी और फिर से एक जोर का धक्का लगा दिया, जिससे बाकी का लंड भी पूरा अंदर समा गया!

फिर एक बार भारती की चीख निकल गई, जिससे दुखी होकर सरिता अपना माथा पकड़कर रोने लगी!

मैंने सरिता से कहा, “क्या तुम अपनी पहली चुदाई भूल गई? तुम भी तो भारती की तरह ही रो और चिल्ला रही थी! चुप करके सो जाओ और आज हमें साली जी को सुख पहुँचाने दो!”

फिर मैंने साली से पूछा, “अब बोलो भारती, क्या अभी भी उतना ही दर्द हो रहा है या कुछ कम हुआ?”

भारती चुप हो गई और आँसू पोंछने लगी और बोली, “दीदी! आज जीजा जी नहीं माने और मुझे बर्बाद कर दिया! ये बहुत बदमाश हैं! बहुत जोर से दर्द हो रहा है!”

सरिता बोली, “अरे! तुमने आखिर इसकी सील तोड़ ही दी न?”

मैंने कहा, “हाँ मेरी जान! तुम्हारी बहन में बहुत मेहनत करनी पड़ी। अब सुहागरात में इसे कोई दर्द नहीं होगा और खूब मजे लेगी!”
और फिर मैं आराम से धक्के लगाने लगा।

साली भी सिसकने लगी, “ऊऊ ऊआई माँ, मर गई! आ ई जीजू, आराम से… दुख रहा है! उई माँ, दीदी इन्हें रोको, नहीं तो मेरी जान निकल जाएगी!”

सरिता बोली, “अब उसे छोड़ दो, वह बहुत दर्द में है। कल तक आराम कर लेने दो!”
मैंने कहा, “मेरे लंड का क्या होगा, जो अभी भी यह खड़ा है?”

सरिता बोली, “मैं किस लिए हूँ? आओ और मुझे भी शांत करो और खुद भी शांत हो जाओ!!”

तब मैं अपनी बीवी के होठों को चूमने लगा और वह मेरा साथ देने लगी।
वह मेरा लंड पकड़कर हिलाने लगी।

जब मैंने उसकी योनि में उंगली डाली तो हैरान हो गया, वह तो पहले से ही पानी-पानी हो गई थी!
सरिता ने कहा कि भारती की चुदाई देखकर उसका भी मन कर रहा है, और फिर मैंने सरिता को भी चोदा।

भारती तब बोली, “अरे दीदी! तुम्हें तो बिल्कुल नहीं दुखता है?”

सरिता ने भारती की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया और धीरे से बोली, “तुम्हारे जीजा बहुत मजे देते हैं!”

सुबह भारती देर तक सोती रही।
तब तक मैं बाजार से सब्जी और पके केले लेकर आया।

तब मैंने भारती को जगाया और उसे केला देकर खाने को कहा।
भारती कहने लगी, “ना बाबा ना! अब नहीं खाऊँगी, बहुत बड़ा है! अब डर लग रहा है!”
और उसने केला सरिता को देकर कहा, “दीदी, तुम्हीं खाओ!”

भारती पूरे दो महीने हमारे साथ रही और हर रोज हमने साथ में चुदाई करी, हर तरीके से!

वर्जिन साली Xxx चुदाई कहानी कैसी लगी आपको?

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