वर्जिन सिस सेक्स कहानी में मेरी चचेरी बहन जवान हो चुकी है मगर भोली है. एक बार हम गाँव गए तो मैं उसे खेतों में ले गया. वहां वो मेरे सामने हगने बैठ गयी.
चचेरी बहन के साथ पहली बार: एक अनकहा अनुभव
दोस्तो! आप सभी को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम टिल्लू (बदला हुआ नाम) है और मेरी चचेरी बहन का नाम मानसी (बदला हुआ नाम) है।

तो मैं बिना समय गंवाए आपको मेरी और मेरी चचेरी बहन की वर्जिन सिस सेक्स कहानी बताता हूँ।
मानसी थोड़ी भोली है, उसे चूदाई के बारे में कुछ भी नहीं पता है।
हुआ यूँ कि हमारा पूरा परिवार दिवाली की छुट्टियाँ मनाने अपने गाँव आया हुआ था।
साथ में मैं और मेरी मानसी भी आ गए।
गाँव में हमारे बहुत सारे खेत हैं।
मैं खेतों की तरफ घूमने निकल रहा था कि मानसी भी मेरे साथ आने की जिद करने लगी तो मैंने उसे भी अपने साथ ले लिया।
हम गाँव में से पैदल ही निकल पड़े।
हमारे खेत गाँव से तीन किलोमीटर दूर हैं, हमने वहाँ जाने के लिए सड़क बनवा रखी है.
छोटी सड़क से होते हुए हम खेत पहुँचे।
खेत में मकई की फसल लगाई हुई थी जो बड़ी हो चुकी थी, चारों तरफ से कुछ नहीं दिखाई देता था।
फिर मैं और मानसी खेत में बनाए हुए कमरे के पास पहुँच कर चारपाई पर बैठ गए।
कुछ देर बैठने के बाद मैंने मानसी को कहा, “मुझे हगने जाना है, तो तू यहाँ बैठ, मैं हग के आता हूँ।”
तो मानसी ने मुझे कहा, “भैया! मुझे भी हगने जाना है, लेकिन यहाँ टॉयलेट नहीं है इसलिए कंट्रोल कर रही थी, क्योंकि मुझे खेत में डर लगता है!”
तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया कि आज इसकी चूदाई की जाए!
तो मैंने जानबूझकर उसे कहा, “मैं तेरे साथ हगने नहीं जा सकता, अगर किसी ने देख लिया तो!”
मानसी ने कहा, “भैया! यहाँ खेतों में दूर-दूर तक कोई नहीं है, प्लीज! मुझे बहुत जोर की टट्टी आई है!”
मैंने कहा, “लेकिन…”
मानसी ने कहा, “लेकिन छोड़ो, जल्दी चलो! मुझसे रहा नहीं जा रहा!”
तो मैंने दो बोतलों में पानी लिया और उसके साथ मकई के खेत के अंदर की तरफ बढ़ने लगा।
मानसी ने कहा, “भैया! मुझे बहुत डर लग रहा है!”
मैंने मानसी से कहा, “थोड़े आगे चलकर तुम हगने बैठ जाना और मैं आगे जाकर दूसरे वाले खेत में हगने बैठ जाऊँगा।”
तो मानसी ने कहा, “नहीं भैया! मुझे बहुत डर लग रहा है, तुम भी मेरे साथ ही हगने बैठ जाओ, यहाँ हमें कौन देखने वाला है!”
तो मैंने आपसे पहले ही कहा था कि मानसी थोड़ी भोली है।
मुझे इसी पल का इंतजार था, तो मैंने कहा, “ठीक है।”
तो उसने जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और हगने बैठ गई और मुझे भी उसके सामने बैठने को कहा।
मैं भी जल्दी से अपनी पैंट उतार कर बैठ गया।
मानसी ने मुझे कहा, “भैया! ये तुम्हारी मूतने की जगह अलग क्यों है और मेरी अलग क्यों है?”
तो मैंने उसे समझाया, “पगली! मैं लड़का हूँ और तू लड़की। लड़कों का लंड होता है और लड़की की चूत।”
तो मानसी ने कहा, “भैया! ये लंड और चूत क्या होता है?”
मैंने कहा, “ये जो मेरे मूतने की जगह है इसे लंड कहते हैं, और जो तेरे मूतने की जगह है इसे चूत कहते हैं।”
मानसी ने कहा, “भैया! मुझे इन सब के बारे में और भी जानना है!”
मैं मन ही मन में खुश हो रहा था क्योंकि मानसी की चूत की सील को मैं तोड़ने वाला हूँ!
मैंने कहा, “ठीक है बताता हूँ, लेकिन ये बात किसी को बताना मत, प्रॉमिस करो, नहीं तो मैं नहीं बताऊँगा!”
तो मानसी ने कहा, “ठीक है भैया!”
मैंने कहा, “तुम्हारा हगना हो गया क्या, बताओ?”
तो मानसी ने कहा, “हो गया है भैया!”
मैंने मानसी से कहा, “ला, मैं तेरा पिछवाड़ा धो देता हूँ।”
वो मुझे मना करने लगी तो मैंने उसे कहा, “मैं तुझे कुछ नहीं बताऊँगा!”
तो मानसी ने कहा, “भैया! धो लो मेरा पिछवाड़ा, लेकिन मुझे सब कुछ बताना!”
तो मैंने मानसी की गांड को पहली बार छुआ।
क्या मुलायम गांड थी दोस्तो!
मैंने उसकी गांड धोते हुए उसकी चूत को भी सहलाया।
मानसी ने कहा, “बहुत अच्छा लगा भैया!”
मैंने कहा, “जाओ और यहीं से थोड़ी दूर अच्छी जगह पर खड़ी रहो, मैं अपना पिछवाड़ा धोके आता हूँ।”
तो मानसी ने कहा, “भैया! मैं आपका पिछवाड़ा धो दूँ?”
मैंने कहा, “धो दो!”
तो मानसी ने भी मेरा पिछवाड़ा धोया।
और जैसे मैंने उसकी चूत को सहलाया था, उसने भी मेरे लंड को सहलाया।
इससे मेरा लंड और भी कड़क और मोटा हो गया।
उसने कहा, “भैया! ये तुम्हारा लंड कितना बड़ा हो गया है!”
तो मैंने उसे कहा, “ये तुम्हारी चूत में जाना चाहता है, इसलिए वह बड़ा हो गया है।”
उसने कहा, “भैया! लंड चूत में जाने से क्या होता है?”
मैंने कहा, “बहुत मजा आता है! तुझे मजा चाहिए?”
तो उसने कहा, “हाँ भैया!”
तब मैंने उसे वहीं जमीन पर लिटाया और उसकी चूत को चाटने लगा।
मानसी ने कहा, “भैया! और जोर से चाटो, बहुत अच्छा लग रहा है! आ आह आआ आ आह भैया! आह आह ओह आ हूँ आह आह ओह ओह आ अम!”
मैंने उसकी चूत को पाँच मिनट तक चूसा और फिर मानसी ने चूत का रस मेरे मुँह में छोड़ दिया।
उसकी चूत ने आधा गिलास रस छोड़ा, मैं वो सारा रस पी गया दोस्तो!
बहुत मीठा सा स्वाद था।
मानसी ने कहा, “भैया! मुझे बहुत मजा आया!”
तो मैंने कहा, “पगली! मेरा लंड तेरी चूत में जायेगा तो और मजा आएगा!”
तो मानसी ने कहा, “भैया! जल्दी अपने लंड को मेरी चूत में डालो, मुझे और भी मजा चाहिए!”
मैं मेरा लंड उसकी चूत पर घिसने लगा।
तो मानसी कहने लगी, “भैया! ऊँ आआ आह आह ओह ओह आ जल्दी डालो ना, बहुत मजा आ रहा है!”
उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरे लंड का टोपा भी उसके चूत के अंदर नहीं जा रहा था।
तो मैंने अपने लंड पर बहुत सारी थूक लगाई और मानसी की चूत को भी थूक से भर दिया और उसके होठों को किस करने लगा।
तो मानसी ने कहा, “बहुत मजा आ रहा है भैया!”
मैंने फिर से उसकी चूत पर लंड सेट किया और उसको किस करने लगा, और फिर एक जोर का झटका लगाया तो मेरा सिर्फ आधा लंड ही अंदर गया।
मानसी छटपटाने लगी और रोने लगी, “भैया! बहुत दर्द हो रहा है! आ आ आआ आ!”
वर्जिन सिस सेक्स के मजे में मैं कहाँ उसकी सुनने वाला था!
फिर से एक और झटका लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंबा-मोटा लंड उसकी चूत में जा चुका था!
मानसी बहुत जोर-जोर से रो रही थी।
अच्छा हुआ कि उस दिन खेतों में कोई नहीं था।
मैंने उसे चुप कराया और धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा।
थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा।
मानसी ने कहा, “बहुत मजा आ रहा है भैया! और जोर से, और जोर से!”
तो मैं और भी उत्तेजित हो गया और जोर-जोर से उसे चोदने लगा।
मानसी भी गांड उठा-उठा कर मेरे नौ इंच लंबे लंड को अपनी चूत में लिए जा रही थी, “आ ओ आ उम आ आह ओह ओह आ यम!”
मैंने मानसी से कहा, “मानसी मजा आ रहा है?”
“हाँ भैया! बहुत मजा आ रहा है! आ आह ओह ओह आ!”
तो मैंने कहा, “तेरे दूध चूसूँ, और भी मजा आएगा!”
तो मानसी ने जल्दी से अपनी टी-शर्ट और ब्रा को ऊपर कर दिया।
मैंने देखा कि मानसी के दूध एकदम रशियन की तरह सफेद और मुलायम हैं, लेकिन छोटे संतरे के आकार के हैं।
मैंने उन्हें चूसा और दबाया।
हम दोनों की चूदाई एक घंटे तक चली और इस एक घंटे में मानसी की चूत ने कई बार अपना पानी छोड़ा।
जैसे ही मेरा पानी निकलने वाला था, मैंने मानसी से कहा, “तुम्हें मेरा पानी पीना होगा, इससे तुम और भी गोरी और खूबसूरत हो जाओगी!”
तो उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया, एक बूँद भी नहीं गिरने दी।
तो मैंने जल्दी से अपनी पैंट पहनी और खड़ा हो गया.
लेकिन मानसी से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था।
इस तरह से मैंने बहन की चूत की सील खोली.
मैंने देखा कि मानसी की चूत सूज गई थी और उससे खू.न बह रहा था।
तो मैंने अपना रुमाल निकाला और उसकी चूत पर लगाया, और फिर उसे पैंटी पहनाई और फिर उसे खड़ा करके पैंट भी पहनाई।
जैसे-तैसे करके मैं उसे खेतों में बने कमरों तक लाया और चारपाई पर बिठाया।
मैंने देखा कि खेतों में दूर-दूर तक कोई नहीं है, दिवाली की वजह से खेतों में कोई नहीं आया था।
मैंने मानसी से कहा, “मजा आया?”
तो उसने कहा, “बहुत मजा आया, लेकिन अब दर्द हो रहा है!”
मैंने कहा, “शाम तक दर्द ठीक हो जाएगा, लेकिन यह बात किसी को मत बताना, वरना बहुत मार पड़ेगी!”
तो मानसी ने कहा, “ठीक है भैया! लेकिन मम्मी ने पूछा तो क्या हुआ, तब क्या बोलूँ?”
मैंने कहा, “बोल देना अमरूद खाने के लिए पेड़ पर चढ़ी थी, उतरते वक्त गिर गई इसलिए पैर में मोच आ गई है।”
उसने कहा, “ठीक है भैया!”
मैंने उसे किस किया और फिर कहा, “मजा आया?”
तो मानसी ने कहा, “बहुत मजा आया भैया!”
मैंने कहा, “और भी मजा आएगा, रात को सोना मत, मैं तुम्हारे रूम में आऊँगा और भी मजा करेंगे! और अब घर चलो, बहुत देर हो गई है।”
तभी चाची का फोन आ गया कि, “कहाँ रह गए तुम दोनों? जल्दी घर आ जाओ!”
मैंने कहा, “हाँ चाची! बस आ ही रहे हैं।”
तो मैंने मानसी को फिर से समझाया कि घर जाते ही मेरा रुमाल फ्लश कर देना और अपना सेनेटरी पैड लगा लेना, और हमारी चूदाई के बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताना।
तो चलिए दोस्तो, मिलते हैं अगली कहानी में बताऊँगा कि कैसे मैंने मानसी के मम्मो को संतरे से खरबूजों जैसा बनाया।
आपको मेरी और मेरी चचेरी बहन मानसी की चूदाई की वर्जिन सिस सेक्स कहानी अच्छी लगी होगी.