माय फर्स्ट Xxx की कहानी में पड़ोस वाली मौसी के साथ मेरी सेटींग बन चुकी थी. वो मेरे घर कंडोम लेकर आई तो मामला साफ़ था. हम दोनों नंगे हुए. मैंने पहली बार नंगी लड़की देखी.
फ्रेंड्स, मैं रतन दत्त आपको अपने मित्र संदीप की सेक्स कहानी सुना रहा था.
सीधे संदीप से ही जानते हैं कि आगे क्या हुआ.
दोस्तो, मैं संदीप आपको कहानी के पहले भाग
पड़ोसन मौसी को चोदने की तमन्ना
में बता रहा था कि मौसी मेरे साथ चुदने के लिए राजी हो गई थीं और हम दोनों एक दूसरे के साथ चूमाचाटी करने लगे थे.
अब आगे माय फर्स्ट Xxx की कहानी:
हम दोनों बेडरूम में आ गए.
मैं मौसी के होंठ चूमने लगा.
मौसी साथ दे रही थीं.
उनकी साड़ी का आंचल गिर गया तो उनके कसे हुए ब्लाउज में कैद बड़े बड़े चूचों को मैं बेताबी से दबाने लगा.
मौसी मेरे होंठ चूसने लगीं.

उनके ब्लाउज के हुक सामने की तरफ थे मैंने हुक खोल दिए और ब्लाउज उतारने लगा.
मौसी ने हाथ उठाकर सहायता की.
मैं उनकी ब्रा खोलने की कोशिश कर रहा था, ब्रा के हुक पीठ पर थे तो मुझसे ब्रा का हुक नहीं खुल रहा था.
मौसी ने अपने हाथ पीछे कर ब्रा उतार दी.
उसी बीच मैंने कुरता उतार दिया.
हम दोनों कमर तक नंगे हो गए.
मैंने मौसी को कसकर आलिंगन में ले लिया.
मेरी नंगी छाती पर मौसी के नंगे चूचे दबे थे, बड़ा मजा आ रहा था.
पता ही नहीं चला कि कब हमने एक दूसरे के बाकी कपड़े उतार दिए.
मौसी ने पलंग पर चित लेटकर अपनी जांघें फैला दीं.
मैंने पहली बार नंगी लड़की देखी थी, मेरा खड़ा लंड झटके ले रहा था.
मैं खड़ा होकर मौसी के नंगे बंदन को निहार रहा था.
सुन्दर चेहरा लम्बी नाक, गोरे बदन पर बड़े बड़े चूचे उस पर भूरे तने निप्पल, उनका पेट सपाट नहीं … वरन थोड़ा मोटा था, उस पर उनकी गहरी नाभि, मांसल मोटी जांघें, फूली हुई बाल रहित चूत देख कर मैं अपनी किस्मत पर नाज़ कर रहा था और बहुत उत्तेजित था.
मौसी- ऐसे मत देखो, मुझे शर्म आ रही है. जल्दी से कंडोम पहनो और मेरे ऊपर आ जाओ.
मैंने कंडोम पैकेट से निकाला और पहनने की कोशिश करने लगा.
मुझे कंडोम पहनना नहीं आता था.
मौसी ‘मैं पहना देती हूँ’ कहकर बैठ गईं.
उन्होंने मेरा लंड अपने कोमल हाथों में पकड़ा और कंडोम पहनाने लगीं.
उनके लंड पकड़ने से मेरी उत्तेजना एकदम से बढ़ गई और मैं झड़ गया. मेरा वीर्य मौसी के हाथ में ही गिर गया.
मैं शर्मिंदा हो गया.
मैंने गर्दन झुकाकर सॉरी कहा, मेरा जोश ठंडा पड़ गया.
मौसी- कोई बात नहीं, तुम्हारा पहली बार है, ऐसा हो जाता है.
मौसी हाथ धोकर आईं और मेरे लंड की तरफ इशारा करके बोलीं- इसे धोकर आओ. पहले खाना खाएंगे, फिर वापस कोशिश करेंगे.
मैं- मैंने बिना कपड़ों की लड़की पहली बार देखी है, वह भी इतनी सुन्दर और सेक्सी बदन की. क्या मैं दूसरी बार मैं सफल होऊंगा?
मौसी- डर गए तो कभी सेक्स नहीं कर पाओगे. फिर से कोशिश करना.
हम दोनों खाना खाने बैठे.
मैं- डिनर के बाद आप घर चली जाओगी?
मौसी- आज रात मैं यही रहूंगी.
डिनर के बाद हम सिगरेट पीने और बातें करने लगे, करीब आधे घंटे बाद हमारा मूड बनने लगा.
मौसी- सम्भोग के समय यदि पुरुष, स्त्री के पहले झड़ जाता है तो स्त्री प्यासी रह जाती है. फोरप्ले जैसे चूमना, एक दूसरे के शरीर को सहलाना अदि से एक दूसरे को गर्म करने के बाद इत्मीनान और धीरे से सम्भोग शुरू करना चाहिए.
मुझे जल्द झड़ने से कैसे बचना है, यह भी बताया.
हम दोनों पुनः बेडरूम में जाकर चूमा चाटी करने लगे, एक दूसरे के होंठ चूसने लगे.
मैंने ब्लाउज उतारने के बाद ब्रा की तरफ हाथ बढ़ाया, मौसी घूम गयी.
उनकी पीठ मेरी तरफ हो गयी.
थोड़ी कोशिश के बाद मैं ब्रा का हुक खोलने में सफल हो गया.
मैं पीछे से उनके चूचे दबाने लगा, गर्दन चूमने लगा.
फिर मैं मौसी के सामने आ गया.
अब मैं उनके एक चूचे को चूस रहा था और दूसरे को दबा रहा था.
मौसी मादक सिसकारियां लेने लगीं.
फिर हम दोनों ने एक दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए.
मौसी ने मेरे खड़े लंड पर कंडोम पहनाया और खुद सिर्फ पैंटी में पलंग पर चित लेट गईं.
मैं उनकी पैंटी उतारने लगा, मौसी ने कमर उठाकर सहयोग किया.
मौसी ने घुटने मोड़कर अपनी जांघें फैला दी.
मैं मौसी के पैरों के बीच जाकर लंड चूत में डालने लगा, पर लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
दरअसल मुझे चुत का छेद ही नहीं मिल रहा था.
मौसी ने लंड पकड़ा और चूत की छेद पर लगाकर कहा- अब डालो.
मैंने कमर को हल्का झटका दिया तो लंड चूत में समा गया.
मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कोई किला फतह कर उस पर झंडा लगा दिया हो.
मैंने मुस्कुराकर मौसी के चेहरे को देखा, मौसी के चहरे पर मुस्कान थी.
मैं इत्मीनान से चुदाई करने लगा.
जब मैं झटके से लंड चूत में डालता, मौसी के बड़े चूचे हिल जाते, बड़ा सुन्दर दृश्य था.
मौसी कमर उठाकर साथ दे रही थीं.
मुझे लगा कि मैं थोड़ी देर में झड़ जाऊंगा.
जैसा कि मौसी ने जल्द झड़ने से बचने का तरीका सिखाया था, तो मैंने लंड चूत से बाहर निकाला और लंड की जड़ को उंगलियों से लपेट कर कसके पकड़ लिया. अब मैं लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा.
कुछ देर बाद मुझे लगा कि मेरा झड़ना टल गया है.
मैं उन्हें फिर से चोदने लगा.
मौसी बोलीं- आह और जोर जोर से!
मैं उन्हें घमासान चोदने लगा.
कुछ पल बाद मौसी का बदन थरथराया और उनकी चूत से ढेर सारा पानी निकल गया.
मौसी निढाल होकर बोलीं- आह मेरा हो गया है.
मैंने थोड़ी देर और चुदाई की और कंडोम में झड़ गया.
मैं मौसी के ऊपर लेटा रहा, मेरा लंड चूत में ही था.
मुझे लग रहा था कि मैं किसी नरम गद्दे पर लेटा हूँ.
फिर मेरा लंड सिकुड़ने लगा.
मौसी ने मुझे उनके ऊपर से उतरने को कहा, तो मैं उतर गया.
मौसी ने बताया, लंड सिकुड़ने के बाद कंडोम ढीला होकर उसमें से वीर्य लीक हो सकता है.
मैं उठ कर कंडोम उतारने लगा और उसे डस्टबिन में डालकर लंड धोने बाथरूम में आ गया.
फिर मैं वापस आया तो मैंने मौसी की उतरी हुई ब्रा को उठा कर उसका साइज टैग देखा, उस पर 34 सी लिखा था.
मैं- मुझे बहुत मजा आया, किसी दूसरे काम में इतना मजा नहीं आया!
मौसी- मुझे भी बहुत मजा आया, मैं चाय बनाकर लाती हूँ.
हम दोनों ही नंगे थे.
मौसी जब नंगी ही किचन में जा रही थीं तो उनके नंगे सुडौल कूल्हे थिरक रहे थे.
हमने चाय सिगरेट पी.
मैं मौसी के बाजू में बैठा था, उनकी मांसल जांघों पर हाथ फेरने लगा.
मुझे जोश आ रहा था और एक बार और सम्भोग करने की इच्छा हो रही थी, पर लंड आधा खड़ा था.
मौसी मेरी तरफ मुँह कर मेरी गोद में बैठ गईं और मेरे होंठ चूमने लगीं.
मैं मौसी के चूचे दबाने लगा.
मौसी ने मेरी छाती पर हाथ फेरा और मेरे पुरुष निप्पल मरोड़ने लगीं.
मेरा लंड खड़ा हो गया.
मौसी पलंग पर चित लेट गईं.
इस बार मैंने कंडोम खुद ही पहन लिया.
मैंने मिसनरी पोजीशन में चोदना शुरू किया और माय फर्स्ट Xxx का मजा लेने लगा.
कुछ देर बाद मौसी ने मुझे रोककर कहा- अब मेरी बारी है.
मुझे चित लिटाकर मौसी मेरे ऊपर आ गईं.
उन्होंने ही मेरा लंड पकड़ कर चूत में डाला और उछल उछल कर लंड की सवारी करने लगीं.
मौसी के चूचे मस्त उछल रहे थे तो मैंने अपने सर नीचे के दो तकिये लगाए और उनके चूचों को दबाने लगा.
जब मौसी रुकतीं, तो मैं सर उठाकर किसी एक चूचे को चूस लेता.
कुछ देर में मौसी थक कर लंड से नीचे उतर गईं और पलंग के किनारे घोड़ी बन खड़ी हो गईं.
मैंने यह पोजीशन सेक्स वीडियो में देखा था.
मैं फर्श पर खड़ा होकर मौसी की कमर पकड़ कर उनकी चूत चोदने लगा.
मौसी कमर हिला कर लंड और अन्दर लेने की कोशिश करने लगीं.
कुछ देर में मौसी शांत हो गईं, उनकी चूत से कामरस बहकर चादर को भिगोने लगा.
मैंने कुछ देर तक उन्हें और चोदा, फिर मैं भी झड़ गया.
हम दोनों बाथरूम से फ्रेश होकर आये.
मौसी ने बताया कि वे सुबह 5 बजे अपने घर जाएंगी.
उन्होंने अलार्म लगाया.
मैं नींद में था, मौसी के मेरे होंठ चूमने से मेरी नींद खुली.
उन्होंने कहा- मैं घर जा रही हूँ!
वे चली गईं, मैं वापस सो गया.
सुबह मैं फ्रेश होकर नाश्ता बना रहा था.
तभी मौसी ने फ़ोन पर पूछा कि क्या कर रहे हो?
मैंने उन्हें बताया कि नाश्ता बना रहा हूँ.
मौसी- अरे नहाए नहीं क्या अब तक?
मैंने मजाक में कह दिया- आप आ जाओ, साथ में नहाएंगे.
मौसी बोलीं- अभी आती हूँ.
मौसी आईं तो हम दोनों ने साथ में नाश्ता किया, फिर एक एक सिगरेट पीकर साथ में बाथरूम गए.
उधर चूमा चाटी के बाद हम दोनों नंगे हो गए.
दिन की रोशनी में मौसी का गोरा बदन चमक रहा था.
मैंने उनके चूचे दबाये, चूसे और उन्होंने भी अपने हाथ से पकड़ पकड़ कर मुझे दूध चुसवाए.
मौसी- हम लोग नहाने आये हैं, मेरी पीठ पर साबुन लगाओ.
मैंने मौसी की पीठ पर साबुन लगाया. फिर जब मैं उनके भरे कूल्हों पर साबुन लगा रहा था.
उस समय मैंने कई हल्के हल्के चांटे उनके दोनों कूल्हों पर मारे.
हर चांटे के साथ मौसी ऊइ ऊइ की आवाज़ निकालतीं तो मैं गर्मा गया और उनसे बाथरूम में ही चुदाई के लिए कहने लगा.
मौसी- तुम नहीं मानोगे!
मैंने कहा- क्यों आपकी चुत में चुनचुनी नहीं हो रही है क्या?
वे हंस दीं और बोलीं- हां, हो रही है!
यह कहकर वे दीवार पर हाथ रखकर झुक गईं.
मैंने बाथरूम में आने से पहले कंडोम साथ में लाकर रख दिया था.
मैं लौड़े पर कंडोम चढ़ा कर पीछे से मौसी की चूत चोदने लगा.
उनकी चुदाई के साथ साथ मैं उनके सुडौल कूल्हों पर चांटे भी मारने लगा.
मौसी सिसकारी ले रही थीं.
मेरी कमर जब मौसी के कूल्हों पर टकराती तो थप थप की मधुर आवाज़ आती.
हम दोनों का यह सम्भोग काफी देर चला. फिर मौसी और मैं साथ साथ झड़ गए.
चुदाई के बाद हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया.
बाहर आकर हम दोनों ने पुनः हल्का नाश्ता किया और उसके बाद मौसी ने कहा- मेरे घर में मेहमान आने वाले हैं, तो तुम भी दोपहर का खाना हमारे घर खाने आ जाना. दीदी ने भी कहा है.
मैंने कहा- और आप मेरे पास कब आओगी?
‘मैं रात को आऊंगी.’
मैं दोपहर में मौसी के घर आ गया.
उनके घर पर दोपहर का खाना बेहद शानदार था.
खाना खाने के बाद मैं घर आकर सो गया.
फिर शाम को दोस्तों से मिलने निकल गया.
मुझे एक महीने बाद नौकरी ज्वाइन करनी थी, मेरे माता पिता भी एक महीने बाद वापस आने वाले थे.
मैं खुश था कि इस पूरे महीने तक तो मौसी के साथ ऐश करूँगा, बाद की बाद में देखी जाएगी.
रात को मौसी दस बजे मेरे पास आकर बोलीं- यार संदीप, आज मैं काफी थक गई हूँ. मेरी सम्भोग करने की इच्छा नहीं है.
यह सुनकर मैं उदास हो गया.
मौसी बोलीं- चल, आज मैं तेरा रस चूस कर निकाल देती हूँ.
मैंने कहा- मुझे भी आपकी चूसनी है!
मौसी- ओके. चलो पहले अच्छे से साबुन से अपने अंग धोकर आते हैं, बदबू आएगी तो चूसने का मन नहीं करेगा.
हम दोनों लंड चूत धोकर आए और 69 पोजीशन में अगल बगल लेट गए.
मौसी का एक पैर बिस्तर पर था, दूसरा मेरी पीठ पर.
मौसी मेरा लंड चूसने लगीं.
मैं उनकी चूत चूसने लगा.
आज कोई पहली बार मेरा लंड चूस रही थी.
सच में मुझे स्वर्गिक आनन्द प्राप्त हो रहा था.
मौसी मेरा सर चूत में दबाकर बोलीं- जीभ अन्दर तक डालकर चूसो!
मैं चूसने लगा.
कुछ देर बाद मुझे लगने लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो मैंने मौसी को बताया.
मौसी मेरी कमर पकड़ कर और जोर जोर से लंड चूसने लगीं.
मैं उनके मुँह में झड़ गया.
मौसी वीर्य पी गईं.
बाद में मौसी की चूत से कामरस निकला तो मैं महसूस किया कि उनकी चुत के रस का स्वाद अजीब सा था.
मैं चुत में मुँह लगाए हुए था और मौसी मेरा सर नहीं छोड़ रही थीं.
मैंने कामरस पी लिया.
सुबह के सम्भोग और रात के मुख मैथुन से हम दोनों संतुष्ट होकर सो गए.
सुबह मौसी चली गईं.
अब मौसी रात को आतीं, कुछ देर फोरप्ले के बाद हम दोनों मुख मैथुन का आनन्द लेते, फिर चुदाई करते.
हम दोनों सेक्स वीडियो और कल्पना से सम्भोग के नए नए आसन आजमाने लगे थे.
सात दिन बाद मौसी ने बताया कि वे अगले तीन रात को नहीं आएंगी, उनका मासिक धर्म शुरू हो गया है.
इन तीन रातों को मैं मौसी की याद में बैचैन रहा.
मुझे समझ आ गया था कि मौसी के मंगेतर के चले जाने के बाद मौसी की कैसी हालत होती है.
मैं मौसी की कल्पना कर मुठ मारता और योजना बनाता कि मौसी के आने के बाद हम किस तरह यौन आनद लेंगे.
हमारे घर के पीछे बड़ा आंगन था, आंगन ऊंची दीवारों से घिरा था और उसमें पिछला दरवाज़ा था.
आंगन में आम का बड़ा पेड़ था.
मैंने योजना बनायी कि हम अगला संम्भोग खुले आसमान के नीचे करेंगे. मैंने हमारे घर झाड़ू पौंछा करने वाली महिला से आंगन को साफ़ करा लिया.
मासिकधर्म खत्म होने के बाद मौसी रात मेरे घर आईं तो वह पूर्णिमा की रात थी. खुले आसमान में चांद की मस्त रोशनी थी.
चूमा-चाटी के बाद मैंने मौसी को खुले आसमान के नीचे यौन क्रीड़ा का प्रस्ताव दिया.
कुछ आनाकानी के बाद मौसी राजी हो गईं.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम लोग ज्यादा आवाज़ नहीं करेंगे. वर्ना पड़ोस के लोग आवाज़ सुन सकते थे.
हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए, एक दूसरे को गर्म किया.
मैंने ट्रांजिस्टर पर गाने लगा दिए, जिससे हमारी चुदाई की आवाज़ स्पष्ट न सुनाई दे.
मौसी पेड़ पकड़ कर झुक गईं.
मैं पीछे से लंड पेल कर उनकी चूत चोद रहा था और चूचे दबा रहा था.
हम दोनों को ही इस तरह से चुदाई करने से खूब मजा आया लेकिन इस तरह से खुले में पेड़ से लग कर चुदने में दिल की एक इच्छा पूरी नहीं हो पा रही थी.
दरअसल मौसी पेड़ पकड़ कर झुकी थीं, मैं उनको पीछे से चोद रहा था.
तो हम चुदाई के समय खुला आसमान नहीं देख पाए थे.
अगली रात मैंने आंगन में गद्दा बिछा दिया.
हमें गद्दे में खूब फोरप्ले किया, मौसी पीठ के बल लेट गईं और मैं उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें चोदने लगा.
मौसी को खुला आसमान दिख रहा था, चाँद की रौशनी में मौसी के डोलते चूचे मस्त लग रहे थे.
बाद मैं चित लेटा मौसी ने मेरे लंड की सवारी की, मुझे आसमान दिख रहा था.
इस तरह से नए नए प्रयोग करके हम दोनों को मस्त यौन आनन्द मिल रहा था.
चुदाई को एक महीना हो गया था.
इस बीच हम दोनों ने हर कमरे में किचन बाथरूम, खुले आसमान के नीचे बिंदास चुदाई का मजा लिया.
अब मेरे माता पिता भी वापस आ गए थे और मैंने नौकरी भी ज्वाइन कर ली.
आगे क्या हुआ, उसे अगले भाग में लिखूँगा.
दोस्तो, अब तक की माय फर्स्ट Xxx की कहानी आपको कैसी लग रही है, प्लीज जरूर बताएं.