गोवा घूमने गई शादीशुदा महिला गैर मर्द से चुद गई

बीच सेक्स कहानी में मेरे शौहर के कारोबार में लगे रहने से मुझे उनसे सोहबत करने का मौक़ा नहीं मिलता था. टाइम पास करने के लिए मैं ड्राईवर को लेकर गोवा चली गयी.

नमस्कार आप सभी को! मैं बिलकिस, उम्र 29 वर्ष, आप सभी का स्वागत करती हूँ।
मैं अपनी एक कामुक आपबीती लिख रही हूँ, कृपया इस पर अपनी प्रतिक्रिया देवें।

मैं एक शादीशुदा औरत हूँ, लेकिन सिर्फ नाम की! अब ‘नाम की’ इसलिए बोली क्योंकि मैं अपने सास-ससुर के साथ बड़ौत उत्तर प्रदेश में रहती हूँ.
और मेरे शौहर का अच्छा-खासा व्यापार खडी देशों में फैला हुआ है तो हम दोनों सिर्फ साल में कुछ वक्त ही साथ बिता पाते हैं।
वह भी कुछ खास नहीं होता।

अब बात बीच सेक्स कहानी पर लाती हूँ।
बात उस वक्त की है जब मेरे सास-ससुर दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में कश्मीर घूमने जाने वाले थे।

मैं उनकी तैयारियाँ करने लगी, साथ ही यह भी सोचने लगी कि जब ये भी नहीं होंगे तो मन कैसे बहलाऊँगी?
काफी सोचकर मैं सासु माँ से बोली- आपकी तीर्थ यात्रा के दौरान मैं भी मायके चली जाती हूँ, अकेली बोर हो जाऊँगी।

उन्होंने मेरी मनोदशा को समझते हुए जाने की इजाजत दे दी।

फिर मैंने अपनी अम्मी से बात की इस बारे में, तो वह भी काम की वजह से इंडिया से बाहर थीं।
तो मैंने सोची कि क्यों न कहीं बाहर घूमकर आ जाती हूँ, मन बहल जाएगा।

लेकिन अकेले जाना मैंने ठीक नहीं समझ इसलिए हमारे ड्राइवर से बात की, जो एक अच्छा दोस्त भी था, साथ चलने के लिए।
उसने हाँ कर दी, लेकिन यह कसम भी ली उससे कि इस बारे में घर में किसी को पता न चले।

हमने जाने के लिए गोवा चुनी जो कि मेरी सबसे पसंदीदा जगह है।
वहाँ के हिसाब से हम दोनों ने ज़रूरी खरीदारी की।

मैं और मोहन, जो कि हमारा ड्राइवर था, निकल पड़े एक खूबसूरत सफर में।

उस सफर में मैंने पहले दिन उसकी सबसे पसंदीदा ड्रेस पहनी हुई थी—बुरखा!

जिसमें वह मुझे हमेशा देखने के लिए लालायित रहता था।

दिल्ली से सीधे गोवा की फ्लाइट लेकर गोआ पहुँच कर हम वहाँ होटल में गए और थोड़ा आराम किया।
फिर शाम को हम गोवा की खूबसूरत सैर पर निकल गए।

उस वक्त मोहन ने सिर्फ एक केपरी और टी-शर्ट, और मैंने एक क्रॉप टॉप और हॉट पैंट पहनी हुई थी।
सबसे पहले उसने बीच पर बीयर से शुरुआत की।

बीयर पीने के बाद वहाँ की ठंडी हवाएँ मेरे बदन को छूकर निकलने लगीं, जिससे मुझे बड़ी अच्छी गुदगुदी होने लगी।

मैं गहरी साँस लेकर उससे बोली- चलो न, टहलने चलते हैं बीच के किनारे!
उसने मुस्कुराते हुए कहा- चलो।

फिर हमने समुद्र की उठती-गिरती लहरों की आवाज़ों के बीच, नम रेत पर टहलना शुरू किया।

कुछ दूर जाते ही लोगों की भीड़ कम होने लगी और चारों तरफ एक खामोशी छाने लगी।

तभी उसने मेरी तरफ देखा और कहा- बीच पर टहलने का असली मज़ा कम ही कपड़ों में है!

शाम का अँधेरा पूरी तरह ढलने को था और ठंडी हवा जिस्म में आग लगा रही थी, तो मैं भी शरमाते और मुस्कुराते हुए बोली, “ठीक है!”

और अपना क्रॉप टॉप उतारकर रेत पर फेंकते हुए आगे बढ़ने लगी और बोली, “आप भी उतार लो अपनी टी-शर्ट!”

तो उसने भी तुरंत अपनी टी-शर्ट उतार दी और हम नंगे बदन टहलने लगे।
कुछ दूर टहलते हुए देखा कि दूर अँधेरे में कोई विदेशी युगल एक-दूसरे की बाहों में समाया हुआ, बेहद शिद्दत से चुंबन कर रहा था।
उन्हें उस हाल में देखकर मोहन मुस्कुराया, साथ में मैं भी कामुकता से मुस्कुरा उठी।

हवा का झोंका और बीयर का नशा अब पूरी तरह हम पर हावी हो रहा था।
कुछ दूर जाने के बाद मोहन ने अचानक रुककर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे करीब खींचते हुए कहा- तुम इस चाँदनी और अँधेरे के बीच बला की खूबसूरत लग रही हो!

मैंने शरमाकर उसको धन्यवाद दिया.
तो उसने मेरी आँखों में आँखें डालकर कहा, “आज की शाम को मैं यादगार बनाना चाहता हूँ!”

मैं सिर्फ मुस्कुराते हुए, धड़कते दिल के साथ नज़रें नीची किए खड़ी हुई थी।
उतने में ही मोहन ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में भींचकर मेरे होठों को चूमना शुरू कर दिया।

समंदर की लहरें तेज़ हो रही थीं और मैं भी नशे और उसकी छुअन के अहसास में बहने लगी।
उसकी इस मदहोश कर देने वाली हरकत ने मुझे पूरी तरह वासना के समंदर में धकेल दिया था।

उसने मुझे चूमते हुए मेरी ब्रा का हुक खोलने की कोशिश की।
मैंने बनावटी हिचकिचाहट के साथ बहुत मना किया कि ‘यहाँ खुले में नहीं!’
लेकिन उसकी दीवानगी के आगे मैं नाकामयाब रही।

मेरे दोनों बूब्स जैसे ही ठंडी हवा के संपर्क में आकर आज़ाद हुए, उसने ठंडी बीयर की कुछ बूंदें मेरे बूब्स पर डाल दीं और उन्हें चूसने लगा।
बीयर की वो ठंडक और उसके मुँह की गर्मी के इस मिलन से मैं मदहोश होने लगी और मेरे मुँह से सिसकियाँ और आहें भरने की आवाज़ें निकलने लगीं।

उसने मेरी हॉट पैंट को भी सरकाकर उतार दिया।
अब मैं सिर्फ एक छोटी सी थॉन्ग पहने हुए उस ठंडी हवा और समंदर के सामने नंगी खड़ी थी।

फिर उसने मेरे काँपते बदन से खेलते हुए मेरी कामुक तारीफें करना शुरू किया।
और मेरी थॉन्ग को भी उसने मेरे पैरों से अलग करते हुए मेरे पूरे जिस्म को पागलों की तरह चूमना शुरू किया, जिससे मेरी कामुकता चरम पर पहुँच गई।

अब मुझसे भी रहा नहीं गया, मैंने भी उसके कपड़े खींचकर उतार दिए।
उसका लोहे जैसा काला और तनाव से भरा लंड मेरे सामने पूरी अकड़ के साथ सलामी दे रहा था, जिसको देखकर मेरी प्यास और बढ़ गई।
मैंने पहले उसे अपने हाथों से सहलाया और फिर सीधे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

उसने दीवानगी में मेरे सिर पर हाथ का दबाव बनाते हुए अपना लंड मेरे हलक के अंदर तक डालना शुरू किया।

फिर उसने मुझे उस मखमली, ठंडी रेत पर लिटा दिया।
पीठ पर ठंडी रेत का अहसास और ऊपर खुला आसमान… और मोहन मेरी चूत और गांड को अपनी जीभ से चूसने लगा।

मैं खुले आसमान के नीचे बिल्कुल जन्नत का एहसास कर रही थी और सोच रही थी कि काश! यह वक्त यहीं रुक जाए।
मैं चूत की उस मीठी खुजली और उसकी जीभ की हरकतों से तड़पने लगी और सिसकते हुए बोली, “प्लीज! अब मत तड़पाओ, डाल दो अंदर!”

फिर उसने अपनी पोजीशन ली और अपना मोटा लंड मेरी प्यासी और गीली चूत में एक ही झटके में डाल दिया।
मैं दर्द और अत्यधिक आनंद के घालमेल से कराह उठी क्योंकि उसका लंड बहुत मोटा और लंबा था।

फिर उसने एक और गहरा झटका दिया, जो मेरी बर्दाश्त के बाहर था, और मेरी आँखों से अनजाने ही आँसू निकलने लगे।

लेकिन कुछ ही पलों में, जब वह ज़ोर-ज़ोर से कमर चलाकर झटके देने लगा, तो वह दर्द गहरे मज़े में बदल गया।
समुद्र की लहरों के शोर के साथ मेरे जिस्म के टकराने की आवाज़ें गूँजने लगीं और मैं मदहोश होकर चिल्लाने लगी, “और ज़ोर-ज़ोर से करो! फाड़ डालो आज मुझे पूरी तरह!”

यह सुनते ही मोहन का जानवर जाग गया, उसने अपने धक्कों की रफ्तार और तेज कर दी।
कुछ देर तक रेत पर मुझे बुरी तरह रगड़कर ताबड़तोड़ धक्के मारने के बाद, उसने एक लंबी सिसकारी भरी और मेरी प्यासी चूत की गहराई में अपना सारा गर्म वीर्य छोड़ दिया।

मैं थकी हुई, लेकिन बेहद संतुष्ट और सुकून भरी नज़रों के साथ मुस्कुरा रही थी और उसके सीने पर हाथ रखकर बोली, “शुक्रिया! जो तुमने मुझे इतना खूबसूरत और कभी न भूलने वाले लम्हे दिए।”

ये थी मेरी गोवा यात्रा की खूबसूरत और कामुक यादें।
आप सभी अपनी राय ज़रूर दीजिएगा और बताइएगा कि आपको मेरी यह हकीकत बीच सेक्स कहानी कैसी लगी।

अगर कोई कमी हुई होगी बीच सेक्स कहानी लिखने में, तो वह भी बताइएगा ताकि मैं अपनी आगे की कहानी में इसको सुधार सकूँ।
धन्यवाद!

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