सेक्स स्वैपिंग मॅाम स्टोरी में मेरा दोस्त मेरी उम्र का पड़ोस में रहता है. उसकी अम्मी बहुत सेक्सी है. उसे मेरी अम्मी सेक्सी लगती थी. एक दिन हमने अपनी अम्मियों को सेक्स की बात करते सुना.
मेरा नाम रफीक है। मैं 23 साल का हूँ। हट्टा-कट्टा, तगड़ा और तंदुरुस्त हूँ। गोरा भी हूँ और हैंडसम भी।
मेरा एक दोस्त है शफीक।
वह भी बिलकुल मेरी ही तरह है और मेरी उम्र का भी है।
हम लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, फिर भी अपना-अपना धंधा खूब अच्छी तरह से चला रहे हैं।
हमारे घर भी अगल-बगल हैं; हम एक दूसरे के घर खूब आते-जाते हैं, एक दूसरे की अम्मी से खूब बातें करते हैं और एक दूसरे की मदद भी करते हैं।

हम लोग पिछले दो-तीन साल से लड़कियों को चोद रहे हैं।
हमारे कुनबे में लड़कियां खूब हैं और उसके कुनबे में भी।
लड़कियां हम लोगों को भाई जान कहती हैं।
हमारे यहाँ भाई जान, देवर, जेठ, शौहर सब एक ही तरह के माने जाते हैं।
यानी लड़कियां इन सबसे खुलकर सेक्स कर सकती हैं और लड़के भी इनसे सेक्स करने में पीछे नहीं रहते।
लड़कियां खूब मस्ती से पकड़ लेती हैं भाई जान के लण्ड और भाई जान भी खूब मजे से पेलते रहते हैं इनकी चूत में लण्ड।
हम दोनों दोस्त लड़कियों को कभी-कभी अलग-अलग चोदते हैं और कभी-कभी एक साथ मिलकर चोदते हैं।
लड़कियों के साथ-साथ कभी-कभी हमें उनकी माँ, उनकी सहेलियाँ, उनकी खाला-फूफी को भी चोदने का मौका मिल जाता है।
मेरी अम्मी का नाम है रहीमा बेगम और शफीक की अम्मी का नाम है शहनाज़ बेगम।
दोनों ही न हिजाब पहनती थीं और न ही बुर्का इस्तेमाल करती थीं।
वो अपने हिसाब से अपनी ज़िन्दगी जीती थीं।
हम लोगों की दोस्ती होने के साथ-साथ हमारी अम्मियों में भी दोस्ती हो गई।
वो दोनों भी खूब मजे से एक दूसरे के साथ उठने-बैठने लगीं, बातें करने लगीं और हंसी-मजाक भी करने लगीं, एक दूसरे के घर भी खूब आने-जाने लगीं।
लगता था कि दो घर नहीं बल्कि घर एक ही है।
मेरी अम्मी जान शफीक से खूब प्यार करती थीं और उसकी अम्मी मुझसे खूब प्यार करती थीं।
हम दोनों मस्त जवान थे, हमारी अम्मियाँ भी मस्त जवान थीं और एक दूसरे से खूब घुल-मिल गई थीं।

मैं जब शफीक के घर जाता तो उसकी अम्मी की बड़ी-बड़ी चूचियाँ देखा करता था।
और वह जब मेरे घर आता तो मेरी अम्मी के बड़े-बड़े दूध पर नज़रें गड़ाए बैठा रहता था।
सेक्स स्वैपिंग मॅाम स्टोरी तब शुरू हुई जब एक दिन जब मैं घर पहुंचा तो देखा कि शफीक की अम्मी मेरे घर में बैठी हुई मेरी अम्मी से कुछ मसालेदार बातें कर रही हैं और हंस भी रही हैं।
मुझे लगा कि बातें कुछ चोदा-चोदी की हो रही हैं।
तो मैं छुपकर उन दोनों की बातें सुनने लगा।
शफीक की अम्मी शहनाज ने कहा, “यार रहीमा, जानती हो कल क्या हुआ? कल मेरी ननद का मस्त जवान लड़का मेरे घर आ गया। वह बड़ा हैंडसम है! उसे देखकर मेरे मन में आया कि इसका लौड़ा बड़ा मस्त होगा! मैं जब गैर मर्दों से चुदवाती हूँ तो इससे क्यों न चुदवाऊँ? ये तो घर का ही लड़का है। जब लण्ड घर में मौजूद है तो फिर क्यों न उसका मजा लूँ?
शहनाज ने आगे बताया, “मैंने उसे पास बैठाया और बातें करने लगी। धीरे-धीरे गंदी-गंदी बातें भी करने लगी। फिर मेरे मुंह से निकला ‘बेटा, तेरा लण्ड कितना बड़ा है?’ वह भी बिंदास बोला ‘लण्ड तो मेरा साहिर अंकल के लण्ड के बराबर है, आंटी!’ साहिर का लण्ड मैं पहचानती थी। मैंने कहा ‘माशाल्ला! तब तो बहुत बड़ा है। तेरा लण्ड दिखाओ ज़रा मुझे!’”
वो आगे बोली, “मैंने पजामा खोलकर उसका लण्ड बाहर निकाल लिया। लण्ड साला बड़ा जबरदस्त था और खड़ा भी था। मेरे पकड़ने से वह और तन गया। फिर क्या … मैंने उसे मुंह में लिया और फिर सलवार खोलकर चूत में भी ले लिया। यार, ये नए ताज़े मस्त जवान लड़कों के लण्ड बड़ा मजा देते हैं!”
मेरी अम्मी ने कहा, “हाँ, तू सही कह रही है शहनाज़! मैंने भी एक दिन अपने बेटे के दोस्त अरमान का लौड़ा पकड़ा था। लौड़ा बहनचोद बड़ा मोटा और तगड़ा था! मैंने उससे चुदवाया तो नहीं, पर लण्ड चूसा खूब। और फिर मुट्ठी मारकर उसका मक्खन चाटा। बड़ा स्वादिष्ट है उसका लण्ड। अब किसी दिन उससे चुदवा भी लूंगी!”
मैं यह सुनकर दंग रह गया कि मेरी अम्मी ने मेरे ही दोस्त का लण्ड चाटा और उससे चुदवाने के लिए भी तैयार हैं।
फिर मैंने पूरी बात अपने दोस्त शफीक को बता दी।
हम दोनों बैठकर सोचने लगे कि अब क्या किया जाए।
मैं बोला, “लण्ड मेरा भी तन जाता है तेरी अम्मी के नाम पर और लण्ड तेरा भी खड़ा हो जाता है मेरी अम्मी के नाम पर!”
उसने कहा, “हाँ यार, मैं जब तेरी अम्मी को देखता हूँ तो मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है!”
मैंने कहा, “यार, मुझे तो तेरी अम्मी जान की बड़ी-बड़ी चूचियाँ देखकर ताव आ जाता है! कुछ भी हो, हम दोनों की अम्मियाँ अभी मस्त जवान हैं!”
वह बोला, “तो फिर तू मेरी अम्मी को अपना लौड़ा पकड़ा क्यों नहीं देता? मैं तो कहता हूँ कि अगर तुझे मौका मिले तो पेल दे लण्ड मेरी अम्मी की चूत में!”
मैंने कहा, “तो फिर तू क्यों नहीं पेल देता अपना लण्ड मेरी अम्मी की चूत में? तुझे भी तो मेरी अम्मी अच्छी लगती हैं। दोस्त की अम्मी चोदने में कोई हर्ज़ नहीं है। यह बात मेरी खाला ने मुझे बताया था!”
वह बोला, “हाँ यार, सुना मैंने भी है अपनी फूफी जान से कि लोग आजकल एक दूसरे की माँ-बहन लण्ड-लण्ड पेल-पेलकर खूब मजे से चोदते हैं!”
मैंने कहा, “तो फिर तू मेरी माँ चोद ले, मैं तेरी माँ चोद लूं!”
इसी मकसद से हम अगले दिन दोपहर के समय सन्नाटे में एक दूसरे के घर में केवल लुंगी पहनकर एकदम नंगे बदन घुस गए।
दिन में घर के सारे मर्द काम पर चले जाते हैं और बच्चे स्कूल, इसलिए औरतें खाली रहती हैं और अकेली भी रहती हैं।
यही बढ़िया मौका होता है उन्हें लण्ड पकड़ाने का भी और लण्ड पेलने का भी।
मुझे शफीक की अम्मी शहनाज़ ने देखा तो बोली, “अरे वाह! तुम आज बहुत बढ़िया मौके पर आए हो रफीक!”
वह मुझे अंदर ले गई और बड़े प्यार से बैठा दिया।
उस समय वह नीचे एक सलवार पहने थी और ऊपर गले में एक दुपट्टा पड़ा था।
मुझे लगा कि उसकी चूचियाँ एकदम खुली हुई हैं।
वह बोली, “कोई खास काम है रफीक मुझसे?”
मैंने कहा, “हाँ आंटी, खास काम ही है! पर मैं बताऊँ कैसे? मुझे डर लगता है।”
वह बोली, “मर्द हो तुम तो डरते क्यों हो?”
मैंने कहा, “तुमसे डरता हूँ आंटी, कहीं तुम नाराज़ न हो जाओ!”
वह बोली, “मैं नाराज़ नहीं हूंगी! तुम खुलकर कहो, कुछ भी कहो, मैं नाराज़ नहीं हूंगी!”
मैं चुप रहा।
वह फिर बोली, “मैं नाराज़ नहीं हूंगी भोसड़ी के रफीक! तुम चाहे मुझे गालियां दो, चाहे मुझे नंगी कर दो, चाहे मेरी गांड मार लो!”
मैंने कहा, “मैं तेरा दुपट्टा खींचना चाहता हूँ आंटी!”
वह बोली, “बस इतनी सी बात? लो, मैं खुद दुपट्टा फेंक देती हूँ!”
उसने दुपट्टा फेंका तो उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ मेरे आगे छलक पड़ीं।
मैं आँखें फाड़-फाड़कर उन्हें देखने लगा।
वह बोली, “बस इन्हें देखने के लिए डर रहे थे तुम? लो देखो, खूब देखो! दूर से नहीं, इन्हें पकड़कर देखो!”
उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूचियों पर रख दिया।
मैं मसलने लगा, उन्हें दबाने लगा और चूमने लगा।
मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।
उसे भी मजा आने लगा।
वह भी मेरे नंगे बदन पर हाथ फेरने लगी।
गरम वह भी हो रही थी और गरम मैं भी हो रहा था।
फिर उसने एक ही झटके से लुंगी खोलकर फेंक दी और बोली, “हम दोनों के बीच इस बुर चोदी लुंगी का क्या काम?”
लुंगी खुली तो मेरा लण्ड उसके सामने खड़ा हो गया।
वह लण्ड पकड़कर बोली, “बेटा रफीक, मैं बहनचोद बहुत दिनों से तेरा लण्ड पकड़ना चाह रही थी! आज मौका मिला है मुझे। तेरा लण्ड तो माशा अल्लाह बड़े-बड़े लोगों के लण्ड के बराबर है यार! मोटा भी है तेरा लण्ड, सख्त भी है तेरा लण्ड और एकदम तरो-ताज़ा भी है तेरा लण्ड!”
उसने मेरा लण्ड कई बार चूमा, उसे पुचकारा और प्यार किया।
ये तो ज़ाहिर हो गया कि आंटी को मेरा लण्ड पसंद आ गया।
तो मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और सीधे उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा।
छोटी-छोटी झाटों वाली चूत बड़ी टाइट और सेक्सी लग रही थी।
दूसरे हाथ से उसके बड़े-बड़े दूध दबाने लगा।
लेकिन आंटी ने जब मेरा लण्ड चूसना शुरू किया तो बड़ी देर तक मुंह से निकाला ही नहीं।
चूसती ही रही।
मैंने कहा, “आंटी, मैं मुंह में ही झड़ जाऊंगा! लण्ड मुंह से निकालो!”
पर वह मानी नहीं।
मेरे बहुत कहने पर उसने थोड़ा लण्ड निकाला और बोली, “इतना बढ़िया लण्ड है तो कौन भोसड़ी वाली मुंह से निकालेगी?”
वह फिर लण्ड पूरा मुंह में भरकर चूसने लगी।
आखिरकार मैं उसके मुंह में ही झड़ गया और वह मेरा सारा सीमेन चाट गई।
मैंने कहा, “लो आंटी, आज तो मैं तुम्हें चोद नहीं पाया! मेरा चोदने का बड़ा मन था।”
वह बोली, “बेटा रफीक, मेरी चूत कहीं भागी नहीं जा रही! तुम कल चोद लेना!”
शाम को जब शफीक मुझसे मिला तो मैंने उसे सारा किस्सा सुना दिया।
वह बोला, “यार, मेरे साथ भी यही हुआ! तेरी अम्मी को मेरा लण्ड बहुत पसंद आया। उसने मेरे लण्ड को खूब प्यार किया। फिर वह खुद ही अपने सारे कपड़े खोलकर मेरे आगे नंगी हो गईं और मेरा लण्ड अपने पूरे बदन पर घुमाया। यार रफीक, तेरी अम्मी गज़ब की खूबसूरत हैं! न उसकी चूत ढीली हुई और न चूँचियाँ। चूँचियाँ तो मस्त आज भी तनी हुई हैं जिन्हें मैं बड़ी देर तक मसलता रहा और पम्प करता रहा। वह मेरा लण्ड चाटती और चूसती रहीं। उसके बाद वही हुआ जो तेरे साथ हुआ। मैं उसकी चूत में लण्ड पेलने के पहले ही झड़ गया।”
मैं जब अपने घर वापस आया तो देखा कि घर में शफीक की अम्मी शहनाज़ मेरे घर बैठी हुई हैं।
मुझे थोड़ा डर लगा कि कहीं मेरी नाराजगी ज़ाहिर करने तो नहीं आई हैं?
तब तक मेरी अम्मी भी सामने आकर बैठ गईं।
मगर दोनों ही बड़ी खुश नज़र आ रही थीं।
मैं चुपचाप फिर उन्हें सुनने लगा।
शहनाज़ आंटी बोली, “अरे रहीमा, आज मैं तुमको एक खुशखबरी देने आई हूँ!”
मेरी अम्मी ने कहा, “अच्छा, तो बताओ न क्या खुशखबरी है शहनाज़?”
“मुझे कल इत्तिफाक से तेरे बेटे का लण्ड पकड़ने का मौका मिल गया। यार क्या मस्त लौड़ा है उसका! मजा आ गया! एकदम 40/45 साले के मर्द के लण्ड जैसा है उसका लण्ड! खूबसूरत भी बहुत है बहनचोद!”
“फिर क्या किया तूने मेरे बेटे का लण्ड पकड़कर?”
“खूब मस्ती की उसके साथ! खूब चूमा, चाटा और चूसा लण्ड! हम दोनों बहुत उत्तेजित थे। वह भी पूरा नंगा था, मैं भी पूरी नंगी। मुझे लण्ड चूसना बड़ा मजा दे रहा था तो मैंने लण्ड मुंह से निकाला ही नहीं। फिर वह मुंह में ही झड़ गया और चला गया। मैं सच में चुदासी रह गई!”
“वाह! क्या इत्तिफाक है! कल मैंने भी तेरे बेटे शफीक का लण्ड पकड़ा। लौड़ा उसका भी बड़ा शानदार है। लण्ड का टोपा तो गज़ब का है! मैंने नंगी होकर पकड़ा था उसका लण्ड। मैंने भी लण्ड खूब मजे से चाटा और चूसा। फिर वह भी मुंह में ही झड़ गया। बड़ा स्वादिष्ट है शहनाज़, तेरे बेटे का लण्ड! मैंने उससे कहा, ‘बेटा, जल्दी ही मुझे चोदने आना। मैं तेरे लण्ड का इंतज़ार करूंगी।’”
“तो फिर आज ही रात को क्यों न रख लिया जाए चुदाई का प्रोग्राम?”
“हाँ, मैं तैयार हूँ! मैं तेरे घर शाम को 8 बजे आ जाऊंगी।”
“हाँ हाँ, जरूर आ जाना अपने बेटे के साथ! मैं तेरा इंतज़ार करूंगी!”
उनकी बातें सुनकर मेरा तो लौड़ा खड़ा हो गया।
मैं दौड़ा-दौड़ा गया और शफीक को पूरी कहानी सुना दी तो उसका भी लौड़ा तन गया।
मैंने कहा, “आज तू मेरी माँ चोदेगा! तेरी इच्छा पूरी होगी!”
वह बोला, “हाँ यार, तू भी तो मेरी माँ चोदेगा! तेरी भी तमन्ना पूरी होगी! तो फिर चलो, आज हम लोग एक दूसरे की माँ की चूत में लण्ड पेलें! कितना मजा आएगा!”
शफीक अपनी अम्मी के साथ आ गया।
मैं अपनी अम्मी के साथ बैठा ही था।
अम्मी ने सबका वेलकम किया और चाय-नाश्ता कराया।
फिर अम्मी ने शफीक के पजामे में हाथ घुसेड़ दिया और उसकी अम्मी ने मेरे पजामे में।
मैं थोड़ा शरमाया तो आंटी बोली, “अरे रफीक, शर्मा क्यों रहा है? कल ही तो मैंने अकेले में तेरा लण्ड पकड़ा था! आज मैं तेरी अम्मी के सामने तेरा लण्ड पकड़ूंगी। अम्मी से क्या शर्माना?”
तब तक मेरी अम्मी ने शफीक का लौड़ा बाहर निकाल लिया।
शफीक की अम्मी बोली, “हायल्ला! मुझे नहीं मालूम था कि मेरे बेटे का लण्ड इतना बड़ा हो गया है!”
तब तक अम्मी ने भी कपड़े उतार दिए और आंटी ने भी।
उन दोनों को नंगी देखकर हम दोनों के लण्ड और ज्यादा सख्त होकर हिनहिनाने लगे।
फिर मैं मस्ती से उसकी माँ की चूत सहलाने लगा, वह मेरी माँ की चूत।
दोनों लण्ड भी गीले थे और दोनों चूत भी गीली।
मैंने देर नहीं लगाई और लण्ड गच्च से पेल दिया शफीक की अम्मी की चूत में।
शफीक ने भी पेल दिया लण्ड भक्क से मेरी अम्मी की चूत में।
शफीक मेरी माँ की चूत चोदने लगा, मैं उसकी माँ की चूत।
हम दोनों की इच्छा पूरी हो रही थी और उन दोनों की भी।
इसलिए चुदाई में दूना मजा आने लगा।
हम दोनों आमने-सामने एक दूसरे की माँ को बड़ी देर तक चोदते रहे।
मेरी अम्मी मुझे शफीक की माँ चोदते हुए देखकर बड़ी खुश हो रही थीं।
उसकी अम्मी भी अपने बेटे को मेरी माँ की चूत चोदते हुए देखकर बड़ी खुश हो रही थीं।
बल्कि बोल भी दिया, “यार रहीमा, मेरा बेटा एकदम मर्दों की तरह तुझे चोद रहा है! मुझे अपने बेटे के लण्ड पर गर्व है!”
फिर मैंने शहनाज़ आंटी को सोफा पर बैठाकर लण्ड उसकी चूँचियों में पेल दिया।
मैं चोदने लगा उसकी मस्तानी चूचियाँ।
मुझे देखकर शफीक भी मेरी अम्मी की चूचियाँ चोदने लगा।
दोनों ही अम्मियाँ एक दूसरे के बेटे से खूब शिद्दत से चुदवाने लगीं।
दोस्त की माँ चोदने का सुख हम दोनों को मिलने लगा।
मेरी अम्मी बोली, “यार शहनाज़, आज पहली बार हम दोनों को एक दूसरे के बेटे से चुदाने का मजा मिल रहा है!”
शहनाज़ आंटी बहुत उत्तेजित होकर बोली, “अब तो मैं अपने बेटे का लण्ड अपनी चूत में पेलकर चुदवाऊंगी! क्योंकि मेरा बेटा भी मेरे लिए पराया मर्द है और मुझे पराये मर्दों से चुदाने की लत है!”
मेरी अम्मी ने कहा, “यार, मैं भी यही कहने वाली थी!”
इतने में अम्मी ने मेरा लण्ड आंटी की चूत से निकालकर अपनी चूत में पेल लिया और शहनाज़ आंटी ने अपने बेटे का लण्ड अपनी चूत में पेल लिया। दोनों अपने-अपने बेटों से ही चुदवाने लगीं।
हम लोग भी आमने-सामने अपनी-अपनी माँ चोदने लगे।
रात भर यही पेला-पेली होती रही।
कभी मैं लण्ड उसकी माँ की चूत में पेलता, कभी अपनी माँ की चूत में।
शफीक भी कभी लण्ड मेरी माँ की चूत में पेलता, कभी अपनी माँ की चूत में!
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी सेक्स स्वैपिंग मॅाम स्टोरी?