बिग ब्रदर बिग लंड स्टोरी में मेरे चचरे भैया मेरे सामने नल पर नहा रहे थे. उनका गठीला शरीर देख मेरी गांड में कुछ होने लगा. तभी मुझे उनका लंड दिख गया.
दोस्तो, मेरा नाम अभि बाबू है.
ये सेक्स कहानी मेरी सच्ची घटना पर आधारित है.
ये बिग ब्रदर बिग लंड स्टोरी उन दिनों की है, जब मेरी उम्र जवानी की दहलीज वाली रही होगी.
मैं उस वक्त बारहवीं में पढ़ता था.

मॉम डैड और बाकी फैमिली के लोग सब पंजाब में रहते थे.
उधर डैड की जॉब थी.
मैं अकेला ही इधर गांव वाले घर में रहता था.
बगल में मेरे चाचा का घर था, वे ही मेरी देखभाल किया करते थे.
चाचा के दो लड़के थे राज और करण.
हमारी फैमिली बहुत अच्छी फैमिली थी.
सब बहुत खुश रहा करते थे.
मेरा घर चाचा के घर से काफी बड़ा था.
इस बड़े घर में मैं अकेला ही रहता था.
अक्टूबर का महीना शुरू हो गया था.
हल्की हल्की सर्दी का आगमन होने लगा था.
मैं खाना कभी कभी ही बनाता था, ज्यादातर मैं चाचा जी के यहां ही खा लेता था.
पापा भी अक्सर चाचा जी या मेरे पास रोज फोन कर लेते थे, मेरा हाल पूछने के लिए.
मेरे चाचा के दोनों लड़कों की शादी हो चुकी थी.
राज भैया की उम्र लगभग 30 साल की रही होगी.
किसी गंभीर बीमारी के चलते भाभी का देहांत हो चुका था.
करण अपनी वाइफ को लेकर बाहर रहता था.
खेती बाड़ी का काम सब राज भैया देखा करते थे.
राज भाई बड़े मेहनती थे.
उनका शरीर एकदम मस्त कसा हुआ ऐसा था, जैसे वे जिम करते हों.
कुछ दिन बीतने के बाद एक दिन मेरे चाचा के नल में किसी कारण बस पानी आना बंद हो गया.
नल सुधरने में आठ दस दिन लगने वाले थे क्योंकि गांव के इकलौते प्लमबर के पास काम ज्यादा था.
मेरे घर में अन्दर नल लगा था
अब सब लोग मेरे यहां से पानी वाला सारा काम करने लगे.
उस दिन शाम का समय था.
राज भाई खेत से काम करके मेरे घर में नहाने के लिए आए.
उन्होंने अपने शरीर पर पहने हुए सारे कपड़े उतार कर बाल्टी में डाल दिए और केवल एक कच्छा पहन कर नहाने के लिए नल के पास आने लगे.
उनका शरीर देख कर मेरे शरीर में कुछ हरकत हो रही थी, पर पता नहीं ये हरकत मुझे क्यों हो रही थी.
भैया करीब आए तो उस वक्त मैं नल के पास में ही चारपायी डाल कर बैठा पढ़ रहा था.
भैया बोले- अभय तुझे पढ़ने में दिक्कत न हो तो मैं नहा लूं?
मैंने उनके लंड से नजरें हटा कर नीचे देखते हुए कहा- हां भैया आप नहा लो … मुझे कोई दिक्कत नहीं है.
उनका कसरती शरीर देख देख कर मैं पागल सा हो रहा था.
ऐसा शरीर मैंने पहले कभी नहीं देखा था.
एकदम गोरा और चिकना.
चौड़ी छाती, गांड पीछे को उभरी हुई और आगे लंड का नजारा तो पूछो ही मत.
वे किसी सांड जैसे लग रहे थे.
कच्छा पहने होने पर भी उनके लंड का आकार एकदम साफ दिख रहा था और बड़ा ही मस्त लग रहा था.
उसकी हिलने वाली हरकत देख कर ऐसे लग रहा था मानो वह कच्छा से बाहर आने को बेकाबू हो.
उन्होंने नल से पानी भरा और कपड़े धोने लगे.
वे कपड़े धोते समय मुझसे बातें भी कर रहे थे.
पर मैं उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा था.
मेरी नजरें उनकी दोनों टांगों के बीच लटक रहे लौड़े पर टिकी हुई थीं.
उनके लंड से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी.
ऐसा लंड मैंने कभी नहीं देखा था और यह भी जब … जब उनका लंड कच्छे के अन्दर से ही रौनक बिखेर रहा था.
कपड़ा धोते समय वे आगे पीछे हो रहे थे तो उनका लंड और लंड के नीचे दोनों गुल्ले खूब हिल रहे थे.
मुझे ये सब देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था.
कुछ देर बाद उन्होंने नहाना शुरू किया.
अपने गोरे गोरे बदन पर पानी डाल रहे थे.
उनके बदन पर पानी की बूंदें देख कर मेरे बदन में झुरझुरी सी हो रही थी.
वे ठंडे पानी की धार पड़ते ही मस्त होकर नहाने लगे थे.
उनका जांघिया गीला हो गया था तो उनका भीगा हुआ लंड और गोटे साफ साफ नजर आ रहे थे.
उनका लंड ऐसे लग रहा था मानो उसने कच्छे को अपने ऊपर टांग रखा हो.
मैं अपनी किताब भी नहीं पढ़ रहा था, बस उनके लंड को ज्यादा देख रहा था.
एक बार उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोले- आ जा तू भी नहा ले!
मेरा बहुत मन था उनके साथ नहाने का … पर मैंने उन्हें मना कर दिया.
वे बोले- ठीक है, तू बाद में नहा लियो.
नहाने के बाद भैया ने अपना कच्छा उतारा और उसे उतारने के पहले अपनी कमर में एक साफी बांध ली.
उस साफ़ी से भैया ने अपने लंड को ढक लिया था.
साफी कसी हुई थी तो उसमें उनका लंड हिलोरें मार रहा था.
साफी बांध कर वे उकड़ू बैठ कर अपने कच्छे को धोने लगे.
दोस्तो, भैया के बैठने के कारण उनका लंड साफ साफ दिखाई दे रहा था.
काफी मोटा और भुजंग काला नाग था.
लौड़े के नीचे दो गोटे बहुत मस्त लग रहे थे.
ये सब नजारा देख कर मेरे मुँह में पता नहीं क्यों, पानी आ गया था.
ऐसा लगा जैसे कोई खाने वाली चीज को देखकर मुँह में पानी आ जाता है.
मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाला और छुप छुप कर उनके लौड़े को देखता रहा.
तभी उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ गयी और वे मुझे देखकर मुस्कुरा दिये.
उन्होंने मुझे देख लिया था कि मैं उनके लंड को बड़ी हसरत से देख रहा था, पर वे बोले कुछ नहीं.
थोड़ी देर बाद भैया नहा कर चले गए.
अब मेरा दिल कर रहा था कि मैं बार बार उनके लंड को देखूँ.
मैं वही सब सोच रहा था.
शाम होने लगी थी तो मैंने भी नहाया और खाना खाने चाचा जी के घर आ गया.
चाची ने खाना निकाला और बोलीं- तुम और भाई खा लो. मैं और तुम्हारे चाचा जी खा चुके हैं.
मैंने कहा- ठीक है.
चाची ने खाना लगा दिया और मैं भैया के कमरे में उनकी थाली देने चला गया.
वे लेटे थे … मुझे देखते ही उठ गए और बोले- अरे आज तुम खाना लाए हो मेरे लिए … आओ हम दोनों एक साथ में खा लेते हैं.
मुझे शर्म आ रही थी.
मैंने कभी उनके साथ खाना नहीं खाया था.
मैं नीचे बैठ कर खाने लगा तो वे बोले- अरे अभय ऊपर आ जाओ न बेड पर बैठ जा … शर्म क्यों कर रहा है? मैं क्या कोई दूसरा हूँ … हूँ तो तेरा भाई ही न!
मैं चुपचाप बेड पर उनके साथ बैठ गया और खाना खाने लगा.
खाने खाते हुए भी मैं बार बार उनके लंड की तरफ ही देख रहा था.
मेरा देखना शायद भैया भी समझ रहे थे.
फिर वे बोले- पता है तुझे कि कल कौन सा त्यौहार है!
मैंने कहा- नहीं पता कौन सा त्यौहार है भैया?
वे उदास स्वर में बोले- कल करवा चौथ है. तेरी भाभी इस दिन हर साल मेरे लिए व्रत रखती थी. मुझे उसकी बहुत याद आ रही है.
मैंने कहा- भैया, ये व्रत क्यों और किस लिए रखा जाता है?
वे बोले- अरे तुझे नहीं पता?
मैंने कहा- नहीं!
वे बोले- औरत अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रखती है. आजकल तो पति पत्नी दोनों ही रात में साथ साथ करवा चौथ का व्रत खोल कर खुशियां मनाते हैं.
मैंने कहा- अच्छा.
उन दिनों मुझे इतनी समझ नहीं थी.
मैंने कहा- भाई आप कहें तो मैं आपकी लम्बी उम्र के लिए व्रत रख लूं?
वे जोर जोर से हंसने लगे- अरे पागल ये सब लड़के लोग नहीं, पति और पत्नियों का त्योहार होता है … तुझे कुछ पता नहीं है. तू क्या मेरी बीवी है जो मेरे लिए व्रत रखेगा?
उन्होंने मुझे बीवी बोला, तो मेरे मन में ख़ुशी की लहर दौड़ उठी.
मैंने फिर उनसे कहा- भैया, भाभी तो अब नहीं हैं … तो क्यों न मैं अपने भैया की लम्बी उम्र की सलामती के लिए ये व्रत रख लूं!
वे और जोर से हंस कर बोले- अरे पागल तू एकदम नादान है. अभी तेरे से ये सब नहीं होगा.
वे फिर से हंसने लगे.
मैं उनको मना रहा था कि कैसे भी करके भैया हां कर दें तो मैं भी उनके लिए ये व्रत रख लूं!
कुछ देर में उन्होंने खाना खा लिया और पानी पिया.
फिर मेरी तरफ देख कर बोले ठीक जैसी तेरी मर्जी … व्रत रख लेना ओके!
मैं खुश हो गया और बोला- ठीक है.
फिर मैं उनके रूम से बाहर आकर अपने घर जाकर लेट गया.
मैं दिल ही दिल में बहुत खुश हो रहा था मगर मैं क्यों इतना खुश था, मुझे खुद पता नहीं था.
जैसे तैसे मुझे नींद आई.
सुबह उठा ब्रश किया, नहाया धोया और रोज की तरह खाना खाने चाचा जी के घर चला गया.
चाची ने देखा और कहा- अभी खा पी लो, रात को खाना चाँद निकलने के बाद ही मिलेगा.
मैंने कहा- वह क्यों चाची?
वे बोलीं- अरे पागल आज करवाचौथ है न! करवाचौथ के दिन व्रत रखा जाता है. मैंने भी रखा है तेरे चाचा की लम्बी उम्र की दुआ के लिए! रात मैं चाँद की पूजा करके तेरे चाचा के हाथ से व्रत खुलवा कर ही खाना खाऊंगी.
मैंने कहा- ठीक है चाची.
ये सारी बात सुन कर मुझे कल वाली बात याद आ गयी.
तभी मैंने चाची से पूछा- भैया खाना नहीं खाएंगे कहा है वे?
चाची बोलीं- तू खा ले, वह खेत पर गया है … अभी आता ही होगा.
फिर मैंने बहाना बनाते हुए कहा- चाची, मैं भैया के साथ ही खाना खाऊंगा. आप अभी मत लाओ मेरे लिए!
मैंने चाची को मना किया, तो वे बोलीं- ठीक है. वह आता ही होगा तब तक तुम जाकर अपनी पढ़ाई करो. तब तक मैं भी अपना काम कर लेती हूँ.
मैं उनके घर से अपने घर आ गया.
मुझे नींद आ गई और मैं बिना खाना खाए ही सो गया.
कुछ देर बाद भैया ने आकर मुझे जगाया.
मैं एकदम झटके से उठा और डर भी गया था.
फिर मैंने देखा कि भैया खड़े हैं पास में!
वे बोले- खाना भी नहीं खाया तूने आज … तबियत तो ठीक है तेरी … चल खाना खा चल कर … मैं जा रहा खाने.
फिर मैंने कहा- मैं ठीक हूँ भैया, आप खा लो जाकर … मुझे आज भूख नहीं है.
काफी बार बोलने के बाद भी मैंने उन्हें मना ही किया.
फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगे.
फिर हंसते हुए बोले- मुझे याद ही नहीं था. आज तो तुमने मेरे लिए करवाचौथ का व्रत रखा है!
यह कह कर वे हंस दिए और खाना खाने चले गए.
उस वक्त दिन के दो बज रहे होंगे.
मुझे बहुत भूख लग रही थी, पर मैंने पता नहीं खुद को कैसे संभाल रखा था.
कुछ देर बाद मैं लेट गया और मुझे नींद आ गयी.
अब मैं सीधे शाम को पांच बजे उठा.
कुछ देर बाद मैंने उठ कर मुँह धोया और वहीं बैठ गया.
अब छह बज चुके थे, सूरज डूब रहा था.
कुछ देर बाद भैया आए और उन्होंने मुझे एक बड़ा सा झोला पकड़ा दिया, जो सामान से ठसाठस भरा था.
भैया बोले- ये रख लो, मैं बाद में ले लूंगा.
मैंने कहा- ठीक है.
वे इतना बोल कर घर चले गए.
मैं उस झोले को बार बार टकटकी लगा कर देख रहा था कि इसमें ऐसा क्या होगा जो भैया बाद में लेने आएंगे!
मुझे रहा नहीं गया.
मैंने खोल कर देखा तो उसमें करवा चौथ का ही सब सामान था.
एक मस्त साड़ी और शृंगार का सारा सामान, एक करवा और चूड़ी का डिब्बा था.
साथ में रसमलाई थी और एक कंडोम का पैकेट भी था.
मुझे उस वक्त समझ नहीं आया था कि ये कंडोम ही है या कुछ और?
रात हो गयी थी.
कुछ खटपट की आवाज आई तो मैं चौंक गया.
मैंने पूरा झोला के सामान को बिना भरे बिस्तर पर रखे कंबल से ढक दिया.
मैं बेड पर ही बैठ गया.
किसी ने गेट खटखटाया तो मैं भाग कर खोलने गया.
सामने देखा तो भैया खड़े थे.
भैया बोले- क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?
मैंने लजाते हुए कहा- हां आपका ही तो घर है … आओ न भैया.
वे बोले- ठीक है चलो!
मैं अब मन ही मन सोच रहा था कि भैया सामान का भरा झोला लेने आए होंगे.
पर फिर वे बोले- अभय तुमने झोला खोल कर देखा, उसमें क्या क्या है?
मैंने झूठ बोलते हुए कहा- नहीं तो … क्या है उसमें?
वे बोले- जो भी है, सब तुम्हारे लिए है. जल्दी से तैयार हो जाना, चाँद निकलने वाला ही है!
इतना बोल कर वे पुनः घर चले गए.
फिर क्या था, मेरी तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा!
मैंने जल्दी से नहाया और तौलिया पहन कर सारा सामान फैला लिया और देखा तो उसमें एक ब्रा पैंटी भी पड़ी थी.
मैंने दोनों को पहना और पहन कर शीशे के पास गया तो मैंने देखा कि मैं एक हॉट और सेक्सी लड़की लग रहा था.
पैंटी में मेरी गांड उभरी हुई ग़जब लग रही थी.
फिर मैंने ब्रा पहनी, ब्रा बिल्कुल मेरे साइज की थी और मुझ पर मस्त लग रही थी.
इसके बाद मैंने साड़ी खोली … मस्त बनारसी साड़ी थी.
मुझे पहननी नहीं आती थी, पर मैंने जैसे तैसे लपेट ली. पर उस साड़ी का ब्लाउज नहीं था.
इसलिए मैंने ब्रा के ऊपर ही साड़ी पहन ली थी.
फिर लेडीज वाले सारे शृंगार को करके तैयार हो गया.
दोस्तो, मेरी गे सेक्स कहानी में आपको मजा आ रहा होगा.
अभी जब मेरी गांड में मेरे भाई का लंड जाएगा तब मेरी गांड का क्या हश्र हुआ, वह सब मैं अगले भाग में लिखूँगा.
बिग ब्रदर बिग लंड स्टोरी पर आप मुझे मेल व कमेंट्स जरूर से लिखें.