ये एक हॉट देसी स्टोरी है, मेरी ज़िंदगी की सबसे छुपी हुई सच्ची कहानी, जिसे मैं हमेशा दफ़न रखना चाहता था। ये कहानी मेरी सौतेली माँ रजनी और मेरे बीच की है, एक ऐसा राज़ जो शादी के तीन दिनों में पनपा और हम दोनों को ऐसे बंधन में बांध गया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। मैं विवान हूँ, 22 साल का लड़का, दिल्ली में रहने वाला। मेरी ज़िंदगी तब बदल गई जब मेरे पापा ने दूसरी शादी कर ली, मेरी अपनी माँ के गुज़रने के कुछ साल बाद। रजनी आंटी, जो अब मेरी सौतेली माँ बनीं, महज़ 34 साल की थीं, बेहद खूबसूरत, गोरा रंग, घने काले बाल और ऐसी आँखें जैसे बिजली चमक रही हो। पापा ने उनसे शादी की तो मुझे अजीब सा लगा, पर मैंने कभी कुछ नहीं कहा। रजनी आंटी का बर्ताव मुझसे हमेशा प्यार भरा रहता, वो मुझे अपने बेटे जैसा मानती थीं, कम से कम शुरू में तो ऐसा ही लगता था।
शादी के तीन दिन बाद की बात है, पापा को अचानक ऑफिस के काम से चेन्नई जाना पड़ा। वो हमें छोड़कर निकल गए, और घर में बस मैं और रजनी आंटी रह गए। जिस दिन पापा गए, उस शाम मौसम ने अचानक करवट ली। बाहर बादल घिर आए, बिजली कड़कने लगी और ठंडी हवाएं चलने लगीं। मैं अपने कमरे में था, लैपटॉप पर कोई फिल्म देख रहा था, तभी रजनी आंटी ने दरवाज़ा खटखटाया। उन्होंने एक पतली सी सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी, गहरा हरा रंग, जो उनकी गोरी त्वचा पर और भी निखर रहा था। साड़ी का पल्लू उनके कंधे से सरक रहा था और उनकी मांसल बाँहें खुली दिख रही थीं। पेटीकोट की जगह उन्होंने सिर्फ साड़ी लपेटी हुई थी, जिससे उनके शरीर का आकार साफ झलक रहा था।
|विवान, बेटा, चाय पियोगे?| उनकी आवाज़ शहद सी मीठी थी। मैंने हाँ कह दिया, और वो कमरे के अंदर आकर पास ही सोफे पर बैठ गईं। चाय का कप मुझे थमाते हुए उनकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों से छू गईं, एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई। मैंने गौर किया कि उन्होंने ब्लाउज़ नहीं पहना हुआ था, सिर्फ साड़ी से ही अपना शरीर ढंक रखा था। उनकी छाती का उभार साड़ी के कपड़े के नीचे साफ दिख रहा था। मेरा मन विचलित हुआ, पर मैंने खुद को संभाला। बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी, तेज़ बौछारें खिड़कियों से टकरा रही थीं। कमरे में हल्का अंधेरा सा था, सिर्फ टेबल लैंप की रोशनी जल रही थी।
रजनी आंटी ने अपने पैर समेटकर सोफे पर बैठते हुए कहा, |बड़ा सुहाना मौसम है, ना?| मैंने सिर हिलाया। वो अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार ऊपर कर रही थीं, और हर बार उनका पेट और कमर का हिस्सा दिख जाता। मैंने नज़रें झुकाने की कोशिश की, लेकिन आँखें बार-बार उन्हीं पर टिक जातीं। मेरे भीतर एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई थी, कुछ ऐसा जो पहले कभी नहीं हुआ था। वो मेरी सौतेली माँ थीं, लेकिन आज वो एक औरत ज़्यादा लग रही थीं, एक बेहद आकर्षक औरत।
|आंटी, आपको ठंड नहीं लग रही?| मैंने पूछा, आवाज़ हल्की सी कांप गई। वो हंसीं, एक खनखनाती हुई हंसी, |ठंड? इस मौसम में किसे ठंड लगती है? उल्टा, बड़ी गर्मी लग रही है मुझे तो।| उन्होंने अपने गले पर हाथ फेरा और मुस्कुराकर मेरी ओर देखा। उनकी नज़रों में कुछ ऐसा था जो सीधे मेरी आत्मा में उतर रहा था। मैं चाय पीता रहा, और हम दोनों फिल्म के बारे में बातें करने लगे। बातचीत के दौरान मैंने नोटिस किया कि वो बार-बार अपने होठों को जीभ से गीला कर रही थीं, और उनकी सांसें थोड़ी तेज़ चल रही थीं।
बारिश और तेज़ हो गई थी, और अचानक बिजली कड़कने की आवाज़ आई, साथ ही पूरे घर की लाइट चली गई। अंधेरा घिर आया। |ओहो!| रजनी आंटी चिल्लाईं और सहसा मेरी बाँह पकड़ ली। उनका स्पर्श बिजली सा था। पूरे कमरे में अब सिर्फ खिड़की से आती बिजली की रोशनी का हल्का साया था। उन्होंने मेरी बाँह नहीं छोड़ी, बल्कि और कस कर पकड़ ली। |डर गई मैं,| वो फुसफुसाईं।
|डरने की बात नहीं है, मैं हूं ना,| मैंने कहा, और अपना दूसरा हाथ उनकी पीठ पर रख दिया। मेरे हाथ का स्पर्श पाते ही उन्होंने एक गहरी सांस ली। मेरी उंगलियों के नीचे सिर्फ साड़ी का पतला कपड़ा था, जिसके नीचे उनकी गर्म त्वचा का एहसास हो रहा था। वो मेरे करीब सरक आईं, उनकी सांसों की गर्माहट मेरे गालों पर पड़ रही थी। मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।
|विवान,| उन्होंने धीमे से कहा, उनकी आवाज़ भारी हो गई थी। |तुम… तुम बड़े हो गए हो, है न?| उनका हाथ मेरी बाँह से सरककर मेरे कंधे पर आ गया। मैं कुछ बोल नहीं पाया, सिर्फ उनकी आँखों में देखता रहा जो अंधेरे में चमक रही थीं। उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में घूमने लगीं, बहुत ही धीमे और कोमलता से। मेरी सांसें रुकने लगी थीं।
|रजनी… आंटी,| मैंने हकलाते हुए कहा, लेकिन उन्होंने अपनी एक उंगली मेरे होठों पर रख दी। |बस रजनी कहो,| उन्होंने फुसफुसाया। मेरा शरीर कांप उठा। मैंने उनकी कमर पर अपना हाथ और कस लिया। अब हम दोनों के बीच कोई दूरी नहीं थी। बिजली की एक और कड़क से कमरा जगमगा उठा, और मैंने उनका चेहरा साफ देखा – उनकी आँखें अधखुली थीं, होंठ कांप रहे थे, और चेहरे पर एक अजीब सी प्यास थी।
मैंने हिम्मत करके अपना चेहरा उनके करीब ले जाया। हमारे होंठ मिलने ही वाले थे कि उन्होंने मेरी कमीज़ की बटन पकड़ ली और मुझे अपनी ओर खींच लिया। हमारे होंठ टकराए और एक ज़ोरदार चुम्मन शुरू हो गया। उनके होंठ मुलायम और गर्म थे, और उनकी ज़बान ने तुरंत मेरे मुंह में घुसने की कोशिश की। मैंने उन्हें पूरी तरह अंदर ले लिया और हमारी जीभें आपस में उलझ गईं। ये चुम्मन इतना गहरा और जोशीला था कि पूरा शरीर झनझना उठा।
मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे, उनके कूल्हों को सहला रहे थे। उनकी साड़ी खिसकने लगी थी, और उनका एक कंधा पूरी तरह नंगा हो गया था। मैंने अपने होंठ उस कंधे पर रख दिए, और वो एक तेज़ सिसकारी भरते हुए पीछे की ओर झुक गईं। |आआह्ह्ह्ह, विवान,| उनकी आवाज़ में एक मीठी कराह थी। मैंने उनकी गर्दन पर चुम्मन का सिलसिला शुरू किया, हर एक चुम्मन के साथ वो मेरे और करीब आती गईं। मेरे हाथों ने उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह हटा दिया, और अब वो सिर्फ एक धोती जैसी लिपटी हुई साड़ी में थीं, उनकी पूरी पीठ और पेट नंगा था।
मैंने उन्हें सोफे पर लिटा दिया और उनके ऊपर झुक गया। मेरी नज़रें सीधे उनकी छाती पर गईं, जो साड़ी के नीचे उठती-गिरती दिख रही थीं। मैंने बड़ी हौले से साड़ी का सिरा पकड़ा और खोलना शुरू किया। एक-एक करके सिलवटें खुलती गईं, और धीरे-धीरे उनका पूरा जिस्म मेरे सामने आ गया। उनकी छातियाँ बेहद खूबसूरत थीं, गोल-मटोल, सफेद संगमरमर जैसी, जिनके सिरे गुलाबी थे और अभी से सख्त हो चुके थे। मेरी सांसें तेज़ हो गईं।
रजनी ने अपने हाथों से मेरा चेहरा पकड़ा और मुझे अपनी छाती की ओर खींच लिया। मैंने अपना मुंह एक चूची पर रखा और उसे चूसना शुरू कर दिया। जैसे ही मेरी जीभ उनके सख्त सिरे पर लगी, उन्होंने एक ज़ोरदार चीख मारी, |उह्ह्ह्ह, हाँ, ऐसे ही, बेटा… नहीं, विवान, चूसो मुझे।| उन्होंने खुद को मेरे मुंह पर ज़ोर से दबा दिया। मैं बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूसता रहा, कभी जीभ से सहलाता, कभी हल्के से दांत गड़ाता। हर बार उनकी कराह और तेज़ होती जाती। उनके हाथ मेरे बालों में थे, और वो मुझे अपने से चिपकाए हुए थीं।
उनकी साड़ी अब पूरी तरह नीचे गिर चुकी थी, और वो बस एक छोटी सी पैंटी में मेरे नीचे लेटी थीं। मेरा एक हाथ उनके पेट पर था, और मैंने उसे धीरे-धीरे नीचे की ओर सरकाना शुरू किया। उनकी नाभि पर उंगलियाँ घुमाते हुए मैं नीचे उतरता गया। उन्होंने अपने पैर थोड़े से खोल दिए, जैसे मुझे इशारा दे रही हों। मेरी उंगलियाँ उनकी पैंटी के किनारे पर पहुंचीं, और मैंने महसूस किया कि वो पूरी तरह भीग चुकी थी। गीलापन इतना था कि पैंटी के बाहर से ही साफ महसूस हो रहा था।
|रजनी, तुम तो बहुत गर्म हो,| मैंने उनके कान में फुसफुसाया। वो सिर्फ हांफती रहीं, उनकी आँखें बंद थीं। मैंने धीरे से उनकी पैंटी उतारी और उसे एक तरफ फेंक दिया। अब वो पूरी तरह नंगी मेरे सामने थीं। उनकी जांघें चिकनी और गोल थीं, और उनके बीच का हिस्सा एक गहरे काले जंगल से ढंका हुआ था, जो उनकी रसीली गीलापन से चमक रहा था। मैंने अपनी उंगलियाँ उस भीगे हुए हिस्से पर रखीं और हल्के से सहलाने लगा। जैसे ही मेरी उंगली उनकी चुत की दरार पर पड़ी, वो बुरी तरह तड़प उठीं।
|आआअह्ह्ह्हह, हे भगवान, विवान,| वो चीखीं, उनकी कमर हवा में उठ गई। मैंने अपनी उंगली को और अंदर की ओर सरकाया, उनकी भीगी हुई चुत की परतों को खोलते हुए। अंदर का हिस्सा बिल्कुल गर्म और चिकना था। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और धीरे-धीरे हिलाने लगा। एक लय में, मैं अंदर-बाहर कर रहा था, और हर बार उनकी चुत से चट-चट की आवाज़ आ रही थी। वो पूरी तरह बहक चुकी थीं, उनकी आँखें पलट गई थीं और मुंह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं।
|अब मत तड़पाओ, विवान,| वो भीख मांगने लगीं, |प्लीज़, अंदर डालो अपना लंड।| उनकी बात सुनकर मेरा अपना लंड और सख्त हो गया। मैंने जल्दी से अपनी पैंट और अंडरवियर उतारे और उनके पैरों के बीच आ गया। मेरा लंड तना हुआ था, सिरा गहरा सुर्ख लाल और चमक रहा था। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और हल्के से सहलाने लगीं। उनकी नर्म उंगलियाँ मेरे लौड़े पर फिर रही थीं, और मैं सिहर उठा।
|कितना बड़ा है,| वो मुस्कुराईं, और उन्होंने मेरे लंड को अपनी चुत के मुहाने पर रखवा लिया। मैंने थोड़ा ज़ोर लगाकर अपने लंड का सिरा अंदर डाला। जैसे ही मेरा लण्ड उनके भीतर घुसा, हम दोनों की एक साथ चीख निकल गई। अंदर इतना गर्म और चिकना था कि मुझे लगा मैं पिघल जाऊंगा। मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर तक धकेल दिया। मेरे अंडकोष उनकी गांड से टकरा रहे थे।
|अब चोदो मुझे, विवान, ज़ोर से चोदो,| वो पुकार उठीं। मैंने अपनी गति तेज़ कर दी। सोफा हमारी रफ्तार से चरमराने लगा। मैं ज़ोर-ज़ोर से उनकी चुत में अपना लंड घुसेड़ रहा था, और वो हर झटके के साथ ज़ोर से कराहतीं। |आह्ह्ह, हाँ, चोदते रहो मुझे, मेरी चुत फाड़ दो,| उनकी आवाज़ गूंज रही थी। कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज़, शरीरों के टकराने की आवाज़, और बाहर बारिश की तेज़ आवाज़ भर गई थी।
ये पहली पोज़िशन थी, मिशनरी पोज़िशन, जिसमें वो पीठ के बल लेटी थीं और मैं उनके ऊपर। मेरे हाथ उनके कंधों पर थे और पूरा शरीर उनके शरीर पर झुका हुआ था। मेरे लंड का कोना उनकी चुत के अंदरूनी हिस्से से टकरा रहा था और हर झटके के साथ उनका पूरा शरीर ऊपर की ओर उछलता था। उनकी छातियाँ ज़ोर-ज़ोर से हिल रही थीं, और मैं बीच-बीच में झुककर उन्हें चूस लेता। ये सिलसिला कई मिनटों तक चला, जब तक कि उन्होंने मुझे रोक नहीं दिया।
|रुको,| वो हांफते हुए बोलीं, |अब मैं ऊपर आकर चुदवाती हूँ, तुम्हें बहुत मज़ा आएगा।| उन्होंने मुझे सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर सवार हो गईं। अब वो मेरे लंड पर बैठी थीं, अपनी चुत को पूरी तरह मेरे लौड़े पर धंसा कर। उन्होंने अपने हाथ मेरी छाती पर रखे और ऊपर-नीचे होने लगीं। ये दूसरी पोज़िशन थी, काउगर्ल। इस पोज़िशन में मेरा लंड उनके अंदर और भी गहराई तक जा रहा था। वो ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थीं, उनकी छातियाँ मेरी आँखों के सामने पागलों की तरह नाच रही थीं। उनकी जांघों के मांसपेशियाँ तन गई थीं, और उनके चेहरे पर एक अलौकिक संतुष्टि का भाव था।
|देखो, विवान, तुम्हारा लंड मेरी चुत में कैसे घुस रहा है,| वो बोलीं, नीचे हमारे जुड़े हुए हिस्से को निहारते हुए। मेरे लंड पर उनकी चुत की चिकनाई चमक रही थी, और हर बार जब वो ऊपर उठतीं, मेरा पूरा लंड निकलकर आता, और फिर वो ज़ोर से बैठ जातीं, जिससे एक गहरी धमाके की आवाज़ होती। उनके मुंह से लगातार आआह्ह्ह, उह्ह्ह्ह, आआअह्ह्ह्हह की आवाज़ें निकल रही थीं। मैंने उनके कूल्हों को पकड़ लिया और अपनी तरफ से भी ज़ोर लगाने लगा। अब हम दोनों की रफ्तार एक हो गई थी, एक तूफानी और तेज़ रफ्तार।
इसी दौरान उन्होंने अपनी एक उंगली अपने मुंह में डाली और चूसने लगीं, मानो मेरे लंड को याद कर रही हों। उनकी आँखें बंद थीं और चेहरा पसीने से भीगा हुआ था। मुझे लगा कि अब मैं ज़्यादा देर नहीं टिक पाऊंगा, पर तभी वो रुक गईं। |अभी नहीं,| उन्होंने चालाकी से मुस्कुराते हुए कहा, |अभी और खेलना है।| मैंने धीरे से एक वीडियो भी बना लिया।
वो मेरे ऊपर से उतरीं और घुटनों के बल सोफे के एक छोर पर झुक गईं, अपनी गांड को मेरी तरफ करके। उनकी पीठ की लाइन खूबसूरत मोड़ ले रही थी, और उनकी गांड के दोनों मांसल हिस्से मुझे बुला रहे थे। |अब डॉगी स्टाइल में चोदो मुझे,| उन्होंने अपनी गर्दन घुमाकर कहा, उनकी आँखों में चमक थी। मैं उठा और उनके पीछे आकर खड़ा हो गया। मैंने उनके कूल्हे पकड़े और अपने लंड को उनकी चुत के मुहाने पर लगाया। एक ही झटके में मैंने पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया।
इस पोज़िशन में मेरा लंड उनकी चुत की दीवारों से बुरी तरह रगड़ खा रहा था। मैं एक जानवर की तरह उन्हें चोद रहा था, मेरे अंडकोष उनकी गांड पर बार-बार टकरा रहे थे। उनकी चीखें अब दहाड़ में बदल गई थीं। |हाँ, हाँ, चोदो, चोदो, मुझे चुदक्कड़ बना दो,| वो चिल्लाईं। मेरा एक हाथ उनके बालों को कस कर पकड़े हुए था और दूसरा उनकी कमर पर। मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी, इतनी तेज़ कि कमरे में सिर्फ चट-चट की आवाज़ गूंजने लगी। उनकी चुत से रिसता हुआ रस मेरे लंड और उनकी जांघों को पूरी तरह भिगो चुका था।
मैंने उनकी गांड पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा, जिससे वो चीख पड़ीं, |और मारो, मुझे मारो, चोदते रहो।| मैंने उनकी दोनों गांडों को पूरी तरह से नोचना शुरू कर दिया, उन पर लाल निशान पड़ने लगे। मैं अपने पूरे वज़न के साथ उन पर टूट रहा था। अचानक मुझे लगा कि मेरा लंड फटने वाला है, मेरी नसें तन गईं, और एक ज़बरदस्त सिहरन मेरी रीढ़ से होती हुई मेरे अंडकोषों में पहुंची। |रजनी, मैं…| मैं चिल्लाया।
|हाँ, अंदर ही डाल दो, चुत में ही माल डालो,| उन्होंने जवाब दिया और अपनी चुत की मांसपेशियाँ कस लीं। ये एहसास इतना तीव्र था कि मैं रोक नहीं पाया। मैंने एक ज़ोरदार झटका लगाया और अपना पूरा माल उनकी चुत के अंदर ही खाली कर दिया। गर्म-गर्म वीर्य की धारें उनके भीतर जाकर फूट रही थीं। वो भी इसी वक्त चरम पर पहुंचीं, उनका पूरा शरीर ऐंठन से तड़प उठा और वो पूरी तरह से मेरे लंड पर गिर गईं। हमारी सांसें मानो थम सी गई थीं।
कुछ देर हम दोनों ऐसे ही चिपके रहे, शरीर पसीने से लथपथ थे और दिल की धड़कनें आसमान छू रही थीं। मेरा लंड अभी भी उनकी चुत के अंदर ही धड़क रहा था। उन्होंने अपना चेहरा मेरी ओर किया और एक हल्की, कमज़ोर सी मुस्कान दी। |ये तो बस शुरुआत है,| वो बोलीं, और मैं दंग रह गया।
हम कुछ देर आराम करने के लिए अपने-अपने कमरे में चले गए, लेकिन उस रात की कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। करीब एक घंटे बाद, जब मैं बिस्तर पर लेटा हुआ उसी पल के बारे में सोच रहा था, मेरे दरवाज़े पर फिर से खटखट हुई। रजनी अंदर आईं, इस बार उन्होंने एक बेहद छोटी सी टी-शर्ट पहनी हुई थी जो मुश्किल से उनकी जांघों तक आ रही थी, और अंदर कुछ नहीं था। उनके उभार साफ दिख रहे थे, और निपल्स टी-शर्ट को छू रहे थे।
|अकेले सो नहीं पा रही,| उन्होंने शरारत भरी नज़र से कहा और बिना इजाज़त के मेरे बिस्तर पर आकर लेट गईं। उनकी गर्म टांगें मेरी टांगों से लिपट गईं। |मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं,| उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया, और मेरा लंड तुरंत सलाम करके खड़ा हो गया।
वो नीचे सरकीं और मेरी पैंट खोलकर मेरे अर्ध-खड़े लण्ड को बाहर निकाल लिया। उन्होंने पहले अपनी जीभ से मेरे लंड के सिरे को छुआ, एक ठंडी-गर्म सी सनसनी दौड़ गई। फिर उन्होंने धीरे-धीरे पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया। उनका मुंह गर्म और तंग था, और उन्होंने अपने गाल अंदर खींचकर एक ज़बरदस्त सक्शन पैदा किया। मैं आआह्ह्ह कर उठा। वो मेरे लंड को एक कुशल चुदक्कड़ की तरह चूस रही थीं, कभी ऊपर-नीचे करतीं, कभी सिर्फ सिरे को चूसतीं, और कभी मेरे अंडकोषों को भी अपने मुंह में ले लेतीं।
|रजनी, तुम बहुत अच्छा चूसती हो,| मैं कराह उठा। मेरी तारीफ सुनकर उन्होंने अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी, उनकी लार मेरे पूरे लंड पर फैल गई थी। मैंने उनके बालों को कस कर पकड़ लिया और धीरे-धीरे उनके मुंह में झटके लगाने लगा। वो सब्र के साथ मेरी हर हरकत को स्वीकार कर रही थीं। उनकी आँखों से पानी बहने लगा था, लेकिन उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया। ये सीन इतना कामुक था कि मैं दोबारा अपने आप पर काबू खोने लगा।
|अब मैं तुम्हें चोदूंगा,| मैंने कहा और उन्हें बिस्तर पर पटक दिया। इस बार मैं सीधे उनकी गांड पर गया। मैंने अपनी उंगलियाँ उनकी चुत में डालकर गीली कीं और फिर उनकी गांड के छेद पर रगड़ने लगा। वो शुरू में थोड़ी सी सिकुड़ीं, लेकिन जल्दी ही उन्होंने अपनी गांड मेरी उंगली के लिए खोल दी। मैंने एक, फिर दो उंगलियाँ डालीं और उनकी गांड को फैलाने लगा। जब वो तैयार हो गईं, तो मैंने अपने लंड का सिरा उनकी गांड के छेद पर लगाया और बेहद धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया।
|आआअह्ह्ह्हह, ये कितना बड़ा लग रहा है,| वो ज़ोर से चीखीं। उनकी गांड मेरे लंड को बुरी तरह से जकड़े हुए थी। मैंने एक बार में पूरा अंदर नहीं डाला, थोड़ा रुक-रुक कर, उन्हें समय देते हुए। जब मेरा पूरा लंड उनकी गांड के अंदर था, तो दोनों की सांसें एक साथ थम गईं। ये अनुभव अकल्पनीय था। मैंने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू किए। गुदा मैथुन की गर्मी और तंगी बिल्कुल अलग थी। मैं उन्हें चोद रहा था, और वो तकिये में मुंह घुसाए ज़ोर-ज़ोर से दबी हुई चीखें मार रही थीं।
मैंने उन्हें घुमाकर फिर से मिशनरी पोज़िशन में लिटा लिया, लेकिन इस बार मेरा लंड उनकी गांड में ही था। मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर डाल लीं और इस गहरी पोज़िशन में उनकी गांड को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। हर धक्के के साथ मेरा लंड उनके पेट में कुछ हलचल पैदा कर रहा था। उन्होंने अपनी उंगलियाँ अपनी चुत पर रख लीं और खुद को उत्तेजित करने लगीं। |हाँ, चोदो, मेरी गांड चोदो, मैं तुम्हारी चुदक्कड़ हूँ,| वो चिल्लाईं।
अंत में, मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनके चेहरे के ऊपर झटके लगाने लगा। उन्होंने अपना मुंह खोल लिया और जीभ बाहर निकाल ली। मेरे अंडकोषों में जमा हुआ माल फिर से बाहर आने को बेताब था। मैंने कुछ ज़ोरदार झटके लगाए और मेरे वीर्य की गर्म-गर्म धारें निकलकर उनके चेहरे, उनकी जीभ और उनकी आँखों पर पड़ीं। वो पूरी तरह से मेरे माल में नहा गईं, और फिर उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे वीर्य को समेटकर अपने मुंह में डाल लिया और निगल गईं।
वो तीन दिन ऐसे ही गुज़रे। न खाने का होश, न सोने का। सिर्फ शरीरों का संगम, एक-दूसरे को चोदने का भूत हम दोनों पर सवार था। हर तरह की चुदाई की हमने, हर पोज़िशन में, हर कमरे में। रसोई में खाना बनाते वक्त पीछे से चोदना, बाथरूम में शॉवर के नीचे दीवार से लगाकर चोदना, और लिविंग रूम के फर्श पर बेतहाशा चुदाई। मेरा लंड और उनकी चुत हर वक्त जुड़े रहते। रजनी ने तीन दिनों में मुझे चुदाई का हर वो पैंतरा सिखा दिया जो एक औरत ही सिखा सकती है। वो मेरी सौतेली माँ कम और एक पूर्णकालिक प्रेमिका और चुदक्कड़ ज़्यादा बन गई थीं।
आखिरी रात, थक कर चूर हुए हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे बिस्तर पर लेटे थे। |पापा कल आ जाएंगे,| मैंने कहा। वो चुप रहीं, और फिर बोलीं, |तो क्या? ये हमारा राज़ रहेगा, और जब भी मौका मिलेगा, तुम्हारा लौड़ा मेरी चुत में हमेशा जगह पाएगा।| उनके इस वाक्य ने मेरे शरीर में फिर से गर्मी भर दी, और तीसरी रात भी हम कई बार एक-दूसरे में खोते रहे। सुबह जब पापा के आने का समय हुआ, तो रजनी ने एकदम सामान्य भाव से चाय बनाई और मैं अखबार पढ़ने का नाटक करने लगा। वो दरवाज़ा खोलकर पापा का स्वागत कर रही थीं, और मेरे लंड का खड़ा होना कम नहीं हो रहा था।
, तो सब कुछ सामान्य था। उन्हें नहीं पता था कि पिछले तीन दिनों में घर की चारदीवारी के अंदर क्या क्या हुआ। मैं और सोनम अब भी एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है। हमारे बीच एक गहरा राज़ है, जो हमें जोड़ता है। ये मेरी सच्ची कहानी है, जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, लेकिन आज आप सबसे शेयर कर दी।